बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) ने मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रा लिमिटेड (एमपीवाईपीआईएल) के तहत उपनगरीय बस सेवा के 16 नए रूट तय कर टेंडर जारी कर दिए हैं।
इस पहल से भोपाल के सीमावर्ती गांव आपस में जुड़ेंगे तथा सीहोर, रायसेन और मंडीदीप तक भी सीधी बस सेवा उपलब्ध होगी।

इस मॉडल में बसें निजी ऑपरेटरों द्वारा लाई जाएंगी, जबकि संचालन व्यवस्था, किराया और मॉनिटरिंग पर शासन और बीसीएलएल का नियंत्रण रहेगा।
बसों का संचालन दिसंबर अंत या नए साल 2027 से शुरू हो सकता है, जिसके पहले चरण में 100 से 150 बसें उतारने की तैयारी है।
निगम सीमा बंधन समाप्त
बसों को उपनगरीय दर्जा मिल गया है, जिससे वे अब नगर निगम सीमा के बाहर भी जा सकेंगी।
पहले दूरस्थ गांवों जैसे रातीबड़, बिलखिरिया या बैरागढ़ चीचली से आगे शुरू की गई बसें आरटीओ-पुलिस द्वारा इंटरसिटी बस मानकर रोकी जाती थीं, जिसके कारण भारी जुर्माना लगने से ऐसी सेवाएं बंद करनी पड़ी थीं।
परिवहन विभाग की 6 मई 2026 की अधिसूचना के तहत नगरीय और उपनगरीय मार्गों को आपस में जोड़ दिया गया है, जिससे उपनगरीय सेवा का दर्जा मिलने के कारण नगर निगम सीमा का कानूनी बंधन समाप्त हो गया है।
बसों पर सुगम परिवहन, राज्य शासन और एमपीवाईपीआईएल का लोगो अंकित रहेगा।
परिचालन और सुविधाएं
शुरुआत में प्रत्येक रूट पर न्यूनतम 5 बसें रहेंगी, जिनकी संख्या रूट की लंबाई के अनुसार 12 से 15 और लंबे रूट पर 18 से 20 तक हो सकती है।
प्रमुख स्टॉप पर यात्रियों को औसतन हर 12 से 15 मिनट में बस सुविधा मिलेगी, जबकि अधिकतम अंतराल 15 से 18 मिनट रखने की तैयारी है।
यात्रियों को एप और इलेक्ट्रॉनिक मशीन से टिकट लेने की सुविधा मिलेगी; बस के अंदर टिकट के साथ प्रमुख स्टॉप पर ऑफ-बोर्ड टिकट काउंटर भी उपलब्ध रहेंगे।
सभी बसें जीपीएस/वीएलटीएस से लैस होंगी और इनकी निगरानी सेंट्रल कमांड सेंटर से की जाएगी।
ऑपरेटर डीजल, सीएनजी, एसी या नॉन-एसी बसें चला सकेंगे; पांच साल तक पुरानी बसों को भी जांच के बाद परमिट मिल सकेगा।
ऑपरेटरों को बीसीएलएल डिपो में पार्किंग, रियायती दरें, रेस्ट रूम और रूट पर प्रायोरिटी परमिट की सुविधा प्रदान की जाएगी।

