बुलंद सोच, इंदौर।

जून में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति की एक बैठक पूर्व न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में हुई थी। इस बैठक में हेलमेट, सीट बेल्ट और ड्रिंक एंड ड्राइव को लेकर सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे।
यातायात पुलिस ने हेलमेट न पहनने पर बड़ी संख्या में चालान बनाए हैं, जबकि सीट बेल्ट और ड्रिंक एंड ड्राइव के मामलों में कम सख्ती दिखी है। इस वर्ष 1 जनवरी से 20 अगस्त तक हेलमेट के 1.73 लाख से अधिक चालान बनाए गए। इसी अवधि में सीट बेल्ट के 2,381 और ड्रिंक एंड ड्राइव के 47 चालान दर्ज किए गए।
निर्देशों के बावजूद सर्विस रोड की स्थिति खराब बनी हुई है। मानपुर घाट और भेरू घाट पर इंजीनियरिंग संबंधी खामियों को भी दूर नहीं किया जा सका है। इसके अतिरिक्त, सड़कों पर मार्किंग और संकेतक भी नहीं लगाए गए हैं।
जून में हुई बैठक के दौरान न्यायमूर्ति सप्रे ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सड़क सुरक्षा का मूल्यांकन केवल दावों से नहीं, बल्कि हादसों और मौतों की संख्या में आई कमी से किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सप्रे ने सड़कों का सर्वेक्षण कर वर्षाकाल से पहले गड्ढे भरने, ब्लैक स्पॉट सुधारने, हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमों को सख्ती से लागू करने तथा ड्रिंक एंड ड्राइव पर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने शहर के भीतर और बाहरी सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग बनाने के भी निर्देश दिए थे, हालांकि फिलहाल एक भी स्थान पर ये नजर नहीं आ रही हैं।
इंदौर जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक बैठक आज 11 बजे सिटी बस कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में इंदौर जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था में सुधार और दुर्घटनाओं के कारण होने वाली जनहानि को रोकने के संबंध में चर्चा की जाएगी।
एक संबंधित घटना में, इंदौर में एक अकाउंटेंट की अस्पताल पहुंचने से 20 मिनट पहले ही मौत हो गई, क्योंकि एंबुलेंस में न तो ऑक्सीजन थी और न ही हूटर, जिसके कारण उसे अस्पताल पहुंचने में सवा घंटे का समय लगा।

