बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर की कान्ह-सरस्वती नदी को साफ बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, परंतु यह नदी कभी भी साफ नहीं बन पाई।
इस नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अभ्यास मंडल ने सोमवार को कृष्णपुरा छत्री से एक अभियान का शुभारंभ किया।
अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर ने बताया कि कान्ह-सरस्वती के लिए लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों और लगातार आयोजित हो रहे कार्यक्रमों के कारण ही आज नदी के अस्तित्व को लेकर समाज में चेतना जीवित है।
उन्होंने इस कान्ह-सरस्वती अभियान को नर्मदा आंदोलन जैसे व्यापक जनजागरण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
पर्यावरणविद् डॉ. ओ.पी. जोशी, डॉ. एस.एल. गर्ग और डॉ. दिलीप वाघेला ने नदी पुनर्जीवन के पर्यावरणीय पक्ष को विस्तार से प्रस्तुत किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी को केवल बहते हुए जल के रूप में देखने के बजाय उसके प्राकृतिक जलमार्ग, जलग्रहण क्षेत्र, तालाबों, नालों और वर्षाजल की पूरी प्रणाली को समझना आवश्यक है।
पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सी.बी. सिंह और मुकेश चौहान ने नदी से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कान्ह-सरस्वती इंदौर की पुरानी पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
उन्होंने नदी से जुड़े अतीत के अनुभवों और वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्वप्निल व्यास ने किया, जिन्होंने बताया कि कान्ह-सरस्वती को पुनर्जीवित करने के लिए दो प्रमुख संकल्पों—नदी की नसों को जिंदा रखना और नदी के लिए पानी बचाना—को जनचेतना का हिस्सा बनाना होगा।

