मंडला में लगातार बारिश के कारण नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया है, जिससे छोटा रपटा पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया है और पानी पुल से 5-6 फीट ऊपर बह रहा है। कई घाट और मंदिर भी पानी में डूब गए हैं, जिसमें नावघाट पर गणेश विसर्जन कुंड भी शामिल है। प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग कर होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीमें तैनात की हैं। लोगों से नर्मदा तट से दूर रहने की अपील की गई है और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
इंदौर की कान्ह-सरस्वती नदी को साफ करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदी साफ नहीं हो पाई है। इसे पुनर्जीवित करने के लिए अभ्यास मंडल ने सोमवार को कृष्णपुरा छत्री से एक अभियान शुरू किया। अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर ने कहा कि नदी के अस्तित्व को लेकर समाज में चेतना जीवित है और इस अभियान को नर्मदा आंदोलन जैसे व्यापक जनजागरण से जोड़ने की आवश्यकता है। पर्यावरणविदों ने नदी को एक पूर्ण प्रणाली के रूप में समझने पर जोर दिया, जबकि पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।
इंदौर नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने वाले 80 से अधिक बड़े संस्थानों पर चालानी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त के निर्देश पर भूजल स्तर बढ़ाने और वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष 25,000 सिस्टम लगाने का लक्ष्य है, जिसमें से अब तक 19,700 सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। जल कार्य विभाग की टीमें उन स्थानों पर जुर्माना वसूल रही हैं जहां नोटिस के बाद भी सिस्टम नहीं लगे। निगम ने नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस वर्ष कम बारिश की आशंका के मद्देनजर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक माह पूर्व सभी जिलों को जल स्रोतों का आकलन करने और डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए थे। एक माह बीतने के बाद भी 55 में से केवल 31 जिले ही पानी की उपलब्धता का आकलन कर पाए हैं, जबकि 24 जिलों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। किसी भी जिले ने अभी तक डैशबोर्ड तैयार नहीं किया है, जिससे पानी की स्थिति स्पष्ट होनी थी। रिपोर्ट 15 अगस्त तक आने की उम्मीद है।
इंदौर में भागीरथपुरा त्रासदी में दूषित पानी से 35 लोगों की मौत के बाद सरकार ने जल सुरक्षा पर कड़े कदम उठाए हैं। प्रशासन ने सभी जल स्रोतों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाने, उनकी जियो टैगिंग करने और एक विशेष मॉनिटरिंग सेल गठित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के पर्यावरण प्लान संशोधित किए हैं। एक नौ-सूत्रीय कार्ययोजना बनाई गई है जिसमें नदियों, तालाबों और भूजल स्रोतों की निगरानी व संरक्षण पर जोर दिया गया है। दूषित पानी के हॉट स्पॉट चिह्नित कर सुधार कार्य किए जाएंगे और जनता के लिए शिकायत निवारण हेतु एक ऐप भी लॉन्च किया गया है।