बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर के आनंद मोहन माथुर सभागृह में शनिवार को एक सुरमई शाम का आयोजन किया गया, जो श्रोताओं के लिए यादगार साबित हुई।
नवोदित गायिका सृष्टि जगताप ने इस कार्यक्रम में उन चुनिंदा गजलों और गीतों को पेश किया जो दिल को सुकून देते हैं। इन प्रस्तुतियों के दौरान श्रोता अपनी जिंदगी के किस्सों को गजलों में खोजने लगे।
गजलों के बीच संचालनकर्ता पारुल सुखवानी की शायरी ने भी महफिल को एक अलग रंगत प्रदान की।
गायकी के साथ साजिंदों की संगत और जुगलबंदी ने खूब समां बांधा। संतूर पर मंगेश जगताप, बांसुरी पर विशाल पाठक तथा तबले और हारमोनियम पर विशाल वागले और ओंकार अग्निहोत्री ने कई गीतों में जुगलबंदी प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
इस शाम के कुछ गीत यादगार रहे, जिनमें जगजीत सिंह का गाया गीत “कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे…” और “फिर ले आया दिल…” शामिल थे। महफिल में उपस्थित कुछ जेन-जी दर्शकों के लिए सृष्टि ने “सादगी तो हमारी जरा देखिए…”, “लागी तुमसे दिल की लगन…” और “चुपके से लग जा गले…” जैसे गीत गुनगुनाए, जिससे उन्हें भी महफिल से जोड़ने का प्रयास किया गया।
इस महफिल में चंदू शिंदे, अवधेश दवे और जितेंद्र भांडिया विशेष मेहमान के रूप में मौजूद थे। उनका स्वागत आयोजक अभिषेक गावड़े ने किया।

