रिपोर्टर: बुलंद सोच ब्यूरो
दिनांक: 24 जून 2025
🔥जंग की शुरुआत और नई रणनीतियाँ
- 13 जून को इज़राइल ने “Midnight Hammer” ऑपरेशन के तहत ईरान के इस्फहान, नातांज़ व फोर्डो में परमाणु-आधारित ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की—जिसमें F‑35, ड्रोन और बंकर-बस्टर बम का उपयोग हुआ ।
- जवाबी कार्रवाई में ईरान ने सटीक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों का इस्तेमाल किया — जिसमें तेल रिफाइनरी, अस्पतालों और आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया ।
🧍♂️जनहानि और इंजीनिक संरचनाओं की गिरावट
ईरान:
- लगभग 974 मौतें, 3,400+ घायल, जिसमें सैन्य और नागरिक दोनों शामिल ।
- परमाणु ठिकानों को बड़े पैमाने पर क्षति, फोर्डो और इस्फहान की सुरंगों में गहरी चोट आई ।
इज़राइल:
- लगभग 28–30 मौतें, 1,000+ घायल, जिसमें Beersheba, Tel Aviv, Ramat Aviv और Haifa के नागरिक शामिल ।
- आवासीय इमारतें ध्वस्त, अस्पताल और तेल फैक्ट्रियों में परेशानी, कुछ हिस्सों में स्कूल भी प्रभावित रहे ।
🛡️ आधुनिक सुरक्षा सिस्टम का परिचय
- इज़राइल की Iron Dome, David’s Sling, Arrow और अमेरिकी THAAD प्रणालियों ने लगभग 90% मिसाइलों को निष्क्रिय किया, लेकिन कुछ शुरुआती हमलों ने जान-माल को नुकसान पहुंचाया — खासकर Beersheba में हुआ हमला जिसमें 4–5 लोग मारे गए।
🛰️ साइबर युद्ध और वैश्विक प्रभाव
- ईरान ने साइबर हमलों का सहारा लिया—बैंकिंग नेटवर्क और सरकारी वेबसाइटें ठप पड़ गईं ।
- कतर में स्थित अल‑उदीद अमेरिकी एयरबेस पर 14 मिसाइल दागे गए, जिन्हें इंटरसेप्ट कर दिया गया; किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई ।
- संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन, फ्रांस सहित वैश्विक शक्तियाँ और मध्यस्थ (खासकर कतर) युद्ध विराम की पहल में जुटी रहीं ।
⛽ तेल, स्टॉक और अर्थव्यवस्था पर असर
- तेल की कीमतें 3–7% तक बढ़ीं—Brent करीब $80 पर पहुँच गया, लेकिन फिर युद्धविराम की उम्मीद से 3–4% गिरावट आई ।
- जैसलमेर से सिंगापुर तक फ्लाइट्स लटकी रहीं, एयरस्पेस बंद हुए, और सप्लाई चेन पर बोझ बढ़ा ।
🕊️ युद्धविराम का अनिश्चित क्षण
- 24 जून, सुबह 6 बजे (जीएमटी), अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्विटर पर “THE CEASEFIRE IS NOW IN EFFECT” लिखते हुए दोनों पक्षों को आगाह किया ।
- इज़राइल ने तत्काल युद्धविराम के लिए हामी भरी, जबकि इरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि केवल तभी हमने हमले रोके जब उद्धारकारी होने तक “इज़राइल हमला न रोके” रोकना शुरू किया ।
- हालांकि सुबह तक मिसाइल उड़ानें जारी रहीं, पर वार्ताओं में आरंभ हुआ—और “12‑Day War” पर अंतरराष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद विराम लगा ।
"सबसे बड़ा नुकसान सिर्फ भवनों का नहीं, हमारे विश्वास का हुआ—कि क्या हम अपने रास्तों को संवाद से तय करेंगे या मिसाइलों से?"