Friday, August 29, 2025
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मऊगंज में ‘सोमरस’ का तांडव: शराब–कोरेक्स–गांजा का काला जाल सिस्टम में सेंध

मऊगंज, 25 जून 2025 – मऊगंज जिला इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। जहाँ बीमारों के लिए दवाई, बच्चों के लिए दूध, और हर वर्ग के लिए राशन की कमी है, वहीं शराब, कोरेक्स सिरप और गांजे की घर-घर डिलीवरी रात-दिन जारी है—एक ऐसा तांडव जिसे स्थानीय लोग “सोमरस” कहकर पुकार रहे हैं।

किन वस्तुओं की कमी है, किनका कारोबार खुला?

  • जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति फेल: ग्रामीणों का आरोप है कि राशन, दूध और दवा की कटौती कारणबद्ध है।
  • शराब, कोरेक्स और गांजा की होम डिलीवरी: सोसायटी के हर कोने तक ये पहुँच रहा है—कोरेक्स जैसे बैन सिरप का भी खुला व्यापार हो रहा है ।

कार्रवाई कहां है? – स्थानीय रिपोर्ट्स

  • अनियमित कीमत और वसूली: मलैगवा के हैंदुमना थाना क्षेत्र में सरकारी शराब दुकान ने MRP से ₹50 अधिक वसूला; वीडियो वायरल हुआ
  • हमले, गोलियाँ और खुले संघर्ष:
    • नयाढ़ी के ऑटो चालक शिवसागर पयासी को माफियाओं और पुलिस के कथित गुर्गों ने बेरहमी से पीटा, क्योंकि उसने इनपर आवाज़ उठाई ।
    • बरांव गांव में शराब माफिया ने फिल्मी स्टाइल में फायरिंग की—कारण: वाहन किराए के बकाया पैसे को लेकर विवाद |
    • एक देशी शराब कर्मचारी हमले में घायल हुआ, इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई—जिससे थाने में शव रख कर प्रदर्शन करना पड़ा; परिजन अधिकारियों के निलंबन की मांग कर रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन: निष्क्रियता या मिलीभगत?

  • सरकार की चुप्पी और कार्रवाई का प्रदर्शन:
    • आबकारी विभाग 7 गाँवों में छापे के दौरान 2,320 किग्रा महुआ लाहन और 15 लीटर कच्ची शराब जब्त कर चुका है।
    • इसके पीछे का तर्क भले ही सकारात्मक हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर तस्करी बिना रुके जारी है—जिससे कार्रवाई का औचित्य प्रश्नचिन्ह में है।
  • पुलिस का संरक्षण या समर्थक रवैया:
    • ऑटो चालक प्रकरण और माफिया की खुली क्रूरता से संकेत मिलता है कि पुलिस द्वारा तुष्टिकरण या निष्क्रियता बनी हुई है ।

राजनीतिक–वित्तीय गठजोड़ की गुत्थी

  • राजनीतिक संरक्षण के सुझाव: स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब कारोबारी और तस्कर सिस्टम की चुप्पी से अहित नहीं उठा सकते—जिससे सिस्टम–माफिया गठजोड़ की आंशका पैदा होती है।
  • उत्पादों में अत्यधिक मुनाफा: कोरेक्स और शराब पर असामान्य मुनाफे का मतलब यह है कि लाभच्चरों में सिस्टम का हिस्सा है—वहीं जरूरी वस्तुएं बेसिक स्तर पर बहिष्कृत हैं।

क्षेत्रीय वृहद प्रवृत्तियाँ और जुड़े मामले

  • मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी शराब तस्करी की घटनाएँ सामने आई हैं—उज्जैन में महाकाल थाने की कार्रवाई, भोपाल में गुप्त भंडारण-तस्करी, मोरेना में अवैध शराब व्यापारियों के बीच फायरिंग जैसी घटनाएँ ।
  • राज्य उच्च न्यायालय ने MRP से अधिक दाम पर शराब की बिक्री की जांच के लिए नोटिस जारी किया है —एक संकेत कि विलम्बित मगर प्रभावशाली स्तर पर भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया गम्भीर है।

स्थानीय लोग क्या मांग रहे हैं?

  • पारदर्शी और नियमित छापेमारी: सिर्फ ‘दिखावटी’ एक्शन से काम नहीं चलेगा—गंभीर टीएफ से ठोस कार्रवाई अपेक्षित है।
  • मोहल्ला-स्तर पर निगरानी तंत्र: ग्रामीण त्वरित स्थानीय पुलिस नियंत्रण कक्ष, मोबाइल-आधारित शिकायत सुनवाई, गवाह संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट–स्तरीय जांच (सीबीआई/एसटीएफ): ताकि सिस्टम–माफिया के ठोस गठजोड़ों का निष्पक्ष, साक्ष्यप्रधान खुलासा हो और जवाबदेही स्थापित हो।

✅ निष्कर्ष: बुलंद सोच की दृष्टि

मऊगंज में ‘सोमरस’ सिर उठा चुका है। यह सिर्फ नशा नहीं, यह संरक्षित अपराध संरचना है—जिसमें पुलिस, अपराधी, राजनीती, और प्रशासन का संयोजन स्पष्ट है। सिस्टम को अब यह तय करना होगा:

  • क्या वह जनता के भरोसे को बहाल करेगा, या
  • वही पुरानी राह चुनेगा, जिसमें अपराधियों से समझौता प्राथमिकता है?

लोकतंत्र और न्याय की अस्मिता की लड़ाई यहाँ मैदान में हैं—पूरी कार्रवाई और जवाबदेही अब इंतजार नहीं कर सकती।

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