बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश सरकार सीमेंट-रहित कंक्रीट की सड़कें बनाने के लिए सीएसआईआर-एम्प्री (CSIR-AMPRI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेगी।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बुधवार को एम्प्री भोपाल का भ्रमण किया, जहां उन्होंने आधुनिक तकनीकों और नवीन निर्माण सामग्रियों का अवलोकन किया तथा उनकी उपयोगिता एवं विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।
मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को सड़क, पुल एवं भवन निर्माण परियोजनाओं में स्वदेशी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ एवं लागत-किफायती निर्माण तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का परीक्षण कर उन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के निर्देश दिए।
मंत्री राकेश सिंह ने विशेष रूप से जिओपॉलीमर कंक्रीट की तकनीक को समझा, जिससे बनी सड़क में तराई की आवश्यकता नहीं होती, परिणामस्वरुप पानी की बचत होती है।
इस तकनीक से कम मोटाई में भी एम-40 के अनुरूप मजबूती प्राप्त की जा सकती है।
इस तकनीक का उपयोग पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एम्स भोपाल में किया जा चुका है।
राकेश सिंह ने इस तकनीक को प्रदेश की सड़क परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने फ्लाई ऐश और रेड मड सहित औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्टों से तैयार सड़क निर्माण सामग्री, पेवर ब्लाक, कर्ब स्टोन एवं ड्रेनेज ब्लाक जैसे प्रीकास्ट कंपोनेंट्स का भी अवलोकन किया।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि एम्प्री द्वारा लगभग 16 वर्ष पूर्व लगाए गए पेवर ब्लाक आज भी मजबूत स्थिति में हैं और उन पर काई तक नहीं लगी है।
आगामी इंजीनियर्स डे पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एम्प्री के साथ एमओयू की योजना है।
विजन 2047: सड़क नेटवर्क का विस्तार
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, फोरलेन मार्ग और रिंग रोड के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शहरों को देश के बड़े आर्थिक, औद्योगिक और धार्मिक केंद्रों से जोड़ा जा रहा है।
विजन 2047 के अंतर्गत 1.05 लाख करोड़ रुपये से रोड नेटवर्क तैयार करने की योजना है।
प्रमुख कॉरिडोर और कनेक्टिविटी
वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर के प्रथम चरण में वाराणसी से नागपुर तक कनेक्टिविटी विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
इसके अंतर्गत प्रदेश में जबलपुर-रीवा से लेकर उत्तर प्रदेश सीमा तक और दक्षिण में नागपुर तक मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
मंत्री बुधवार को मंत्रालय में सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।
प्रस्तावित अशोकनगर-सागर-जबलपुर-नागपुर फोरलेन मार्ग एवं सागर-कोटा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के माध्यम से मध्य प्रदेश की राजस्थान और गुजरात की दिशा में कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
सागर-कोटा कॉरिडोर एनएचएआई (NHAI) की कार्ययोजना में शामिल है।
प्रदेश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की योजना भी महत्वपूर्ण है।
जबलपुर से भोपाल तक का मार्ग एमपीआरडीसी (MPRDC) एवं भोपाल से इंदौर तक का मार्ग एनएचएआई द्वारा विकसित किया जाना प्रस्तावित है।
इसके पूर्ण होने से इंदौर-उज्जैन के माध्यम से दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
इसी क्रम में खंडवा (आशापुर)-नर्मदापुरम-जबलपुर-रीवा/सतना कॉरिडोर की तैयारी भी की जा रही है।
यह मार्ग पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की दिशा में कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा।

