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2026-10-17

शिक्षक पात्रता परीक्षा में कम आवेदन: डेढ़ लाख शिक्षकों में से केवल ढाई हजार ने किया पंजीकरण

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (इएसबी) की ओर से सेवारत शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में अंतिम तारीख शुक्रवार है। करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में से अब तक लगभग ढाई हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। कम आवेदन को देखते हुए आवेदन की समय-सीमा बढ़ाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

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शिक्षक संगठनों का विरोध

इएसबी ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर 21 अगस्त से चार सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। परीक्षा 12 अक्टूबर से आयोजित की जानी है, जबकि अभ्यर्थी नौ सितंबर तक आवेदन में संशोधन कर सकेंगे। वहीं, शिक्षक संगठनों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों से आवेदन नहीं करने की अपील की है। संगठनों का तर्क है कि कम आवेदन होने से सरकार पर परीक्षा निरस्त करने का दबाव बनेगा।

पात्रता मानदंड और शिक्षकों की मांगें

इएसबी की नियम पुस्तिका में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य बताई गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। हालांकि, परीक्षा के दायरे में आने वाले शिक्षकों के नाम और कुल संख्या स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक स्पष्ट नहीं किए हैं। शिक्षक संगठन इस सूची को जारी करने की मांग कर रहे हैं।

अन्य आपत्तियां और प्रमुख मांगें

शिक्षकों की आपत्ति ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में दो से अधिक संतान संबंधी जानकारी अनिवार्य किए जाने को लेकर भी है। संगठन ने इस कॉलम को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को आवेदन भरने में परेशानी हो रही है। टीईटी के एक प्रश्न-पत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क तय किया गया है। शिक्षक संगठनों ने परीक्षा शुल्क लेने पर आपत्ति जताई है।

परीक्षा निरस्त करने और स्पष्टता की मांग

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष डीके सिंगौर ने कहा कि केंद्र सरकार को अध्यादेश लाकर परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संतान संबंधी जानकारी अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए और इस कॉलम को हटा देना चाहिए। वहीं, शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि आरटीई अधिनियम के तहत पहले से नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि किन शिक्षकों को परीक्षा देनी है और किन्हें नहीं। उपेंद्र कौशल ने स्थिति स्पष्ट होने तक परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने की मांग की। टीईटी परीक्षा को लेकर असमंजस बना हुआ है, और जबलपुर में भी शिक्षकों के लिए नियम अब तक स्पष्ट नहीं हैं।