लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षकों को उफनते नदी-नाले पार न करने और सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर वेतन काटा जा सकता है और शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर पठन-पाठन में शामिल होना चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण शिक्षकों के लिए आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता जैसी सुविधाओं की मांग की है। आयुक्त ने ऐप में अवकाश विकल्प न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए शिक्षक संघ से टीम बनाने को कहा है।
सरकारी स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। ई-अटेंडेंस एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर शिक्षकों द्वारा दर्ज की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग का मानना है कि इससे नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी और स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण बेहतर होगा। यह व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है।
जबलपुर में शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था में बार-बार लॉगिन समय बदलने से शिक्षक परेशान हैं। पहले 9:30 से 11:30 बजे तक का समय था, जिसे घटाकर 9:30 से 10:30 बजे तक किया गया और अब 10 बजे से पहले लॉगिन के निर्देश हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है और तकनीकी दिक्कतें भी हैं। राज्य शिक्षक संघ जबलपुर के जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी ने इसे शिक्षा सुधार के नाम पर शिक्षकों को मानसिक त्रासदी बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
इंदौर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से 2022 में शुरू हुई सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल योजना के तहत 10 भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि, इनमें से केवल तीन भवनों में ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि अन्य तैयार भवनों जैसे नंदानगर, पाल कांकरिया और शिवनगर में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। मुसाखेड़ी में भूमि आवंटन न होने से काम शुरू नहीं हुआ, वहीं एमओजी लाइन पर निर्माण आधा रुक गया है। शिक्षा विभाग के सिस्टम की विफलता के कारण फर्नीचर व अन्य सुविधाओं का अभाव है, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नौवीं-दसवीं कक्षाओं में संस्कृत शिक्षकों की कमी हो गई है, क्योंकि माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के तहत व्यावसायिक पाठ्यक्रम चुनने वाले छात्र हिंदी और अंग्रेजी को प्राथमिकता दे रहे हैं। संस्कृत तीसरी भाषा के तौर पर उपेक्षित हो रही है, जिससे शिक्षक खाली बैठे हैं। शासन का उद्देश्य संस्कृत को बढ़ावा देना है, जिसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान सक्रिय हुए हैं। अब संस्कृत चुनने वाले छात्रों और खाली कक्षाओं वाले स्कूलों की जानकारी मांगी गई है, ताकि बच्चों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। यह व्यवस्था बायोमेट्रिक या चेहरे की पहचान पर आधारित नहीं होगी, बल्कि कक्षा शिक्षक शिक्षा पोर्टल 3.0 पर छात्रों की उपस्थिति दर्ज करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग का उद्देश्य उच्च स्तर पर विद्यार्थियों के अध्ययन की नियमित निगरानी करना है। कम उपस्थिति वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं और शैक्षणिक सहायता की योजना बनाई जाएगी। यह प्रणाली शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति से भिन्न होगी और पूर्व में प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में किए गए ऐसे ही एक प्रयोग के बाद शुरू की जा रही है।
छिंदवाड़ा के एक पीएमश्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका उमा शर्मा को कक्षा 6 के विद्यार्थियों से आपत्तिजनक बातें कहने और धमकी देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने शिकायत की थी कि शिक्षिका बच्चों से बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बनाने की बात कहती और कक्षा में गाना सुनाती थीं, साथ ही पुलिस में पहुंच का हवाला देकर धमकी भी देती थीं। स्कूल प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी की जांच में ये आरोप सही पाए गए, जिसके बाद लोक शिक्षण संयुक्त संचालक ने निलंबन आदेश जारी किया। शिक्षिका ने इन आरोपों को शिक्षकों द्वारा की गई साजिश बताया है।
भोपाल जिले में भारी बारिश के कारण भोपाल शहर और बैरसिया का संपर्क टूट गया है, तथा ईंटखेड़ी पर हलाली बाणगंगा नदी पुल के ऊपर बह रही है। भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने 10 अगस्त को नर्सरी से 12वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया। यह निर्णय अत्यधिक बारिश, निचले इलाकों में जलभराव और आवागमन की परेशानी के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। हालांकि, शिक्षक और अन्य कर्मचारी स्कूल में उपस्थित रहेंगे।
भोपाल में देर रात से हो रही लगातार तेज बारिश के चलते जिला प्रशासन ने नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। आदेश सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर लागू होगा। शहर में कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित होने के कारण यह फैसला लिया गया है। शिक्षकों और कर्मचारियों को हालांकि स्कूल पहुंचना होगा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति 2026 के चयनित उम्मीदवारों के लिए पारस्परिक जिला परिवर्तन की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह सुविधा उन अभ्यर्थियों के लिए है जिन्हें पारिवारिक, सामाजिक या चिकित्सीय कारणों से आवंटित जिले या विद्यालय में सेवा देने में कठिनाई हो रही है। आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशानुसार, समान श्रेणी के दो चयनित अभ्यर्थी आपसी सहमति से 10 और 11 अगस्त 2026 को टीआरसी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इससे किसी अन्य अभ्यर्थी के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और अंतिम निर्णय आयुक्त द्वारा लिया जाएगा।