मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में आवेदन की अंतिम तिथि शुक्रवार को है, लेकिन डेढ़ लाख सेवारत शिक्षकों में से केवल ढाई हजार ने ही आवेदन किया है। कम पंजीकरण के कारण आवेदन की समय-सीमा बढ़ने की संभावना है। शिक्षक संगठनों ने टीईटी की अनिवार्यता का विरोध करते हुए शिक्षकों से आवेदन न करने की अपील की है, जिससे सरकार पर परीक्षा निरस्त करने का दबाव बने। संगठनों ने 1998-2009 के बीच नियुक्त पात्र शिक्षकों की सूची जारी करने, दो से अधिक संतान संबंधी कॉलम हटाने और परीक्षा शुल्क पर आपत्ति जताई है।
भोपाल में शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत ने एक घोषणा पत्र जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि आंदोलन के दौरान उन्हें कोई क्षति होती है, तो इसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह की होगी। राजपूत लंबे समय से पद वृद्धि की मांग कर रहे हैं, क्योंकि रिक्त पदों के मुकाबले कम पदों से योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
उज्जैन में जिला ग्रामीण कांग्रेस सेवादल ने भाजपा के सेवा संकल्प कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित दीपोत्सव में सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है। संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 17 सितंबर के आयोजन में शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों की भागीदारी न कराने की मांग की। सेवादल अध्यक्ष चैन सिंह चौधरी ने दीपोत्सव को राजनीतिक कार्यक्रम बताते हुए बच्चों को ऐसे आयोजनों से दूर रखने की बात कही। संगठन ने बच्चों को भूख-प्यास और दुर्घटना की आशंका भी जताई। युवा कांग्रेस नेता विजय बोडाना ने भी स्कूली बच्चों को राजनीतिक कार्यक्रम से दूर रखने का समर्थन किया।
मध्य प्रदेश की उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) भर्ती 2023 में 8,721 पदों पर प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसमें से केवल 2,901 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली है। शेष पात्र अभ्यर्थी 10 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाने और द्वितीय काउंसलिंग की मांग को लेकर भोपाल में 21 दिन से अधिक समय से धरने पर हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब 17 हजार पदों की आवश्यकता थी, लेकिन विभाग ने कम पद जारी किए। वे सरकार द्वारा दिए जा रहे कोर्ट केस के हवाले को पदवृद्धि से असंबद्ध बताते हैं और चार वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जबलपुर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना के मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 70 हजार शिक्षकों को वरिष्ठता, मासिक वेतन में 15 से 20 हजार रुपये की वृद्धि और 10 साल तक का एरियर (प्रति शिक्षक 7-8 लाख रुपये) सहित वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है। उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज किए जाने के बाद उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय है।
भोपाल में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को तीसरे दिन भी नीलम पार्क में जारी रहा। आंदोलनरत शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा का बहिष्कार करने और फॉर्म न भरने का आह्वान किया है। उनकी प्रमुख मांगों में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखना और अव्यवहारिक ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त करना शामिल है। मोर्चा पदाधिकारियों ने ठोस निर्णय न होने तक धरना जारी रखने की बात कही। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार पर 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज बढ़कर कुल 5.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षकों को उफनते नदी-नाले पार न करने और सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर वेतन काटा जा सकता है और शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर पठन-पाठन में शामिल होना चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण शिक्षकों के लिए आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता जैसी सुविधाओं की मांग की है। आयुक्त ने ऐप में अवकाश विकल्प न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए शिक्षक संघ से टीम बनाने को कहा है।
सरकारी स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। ई-अटेंडेंस एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर शिक्षकों द्वारा दर्ज की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति पर नजर रखी जा सकेगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग का मानना है कि इससे नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होगी और स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण बेहतर होगा। यह व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है।
जबलपुर में शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था में बार-बार लॉगिन समय बदलने से शिक्षक परेशान हैं। पहले 9:30 से 11:30 बजे तक का समय था, जिसे घटाकर 9:30 से 10:30 बजे तक किया गया और अब 10 बजे से पहले लॉगिन के निर्देश हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है और तकनीकी दिक्कतें भी हैं। राज्य शिक्षक संघ जबलपुर के जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी ने इसे शिक्षा सुधार के नाम पर शिक्षकों को मानसिक त्रासदी बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
इंदौर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से 2022 में शुरू हुई सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल योजना के तहत 10 भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि, इनमें से केवल तीन भवनों में ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि अन्य तैयार भवनों जैसे नंदानगर, पाल कांकरिया और शिवनगर में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। मुसाखेड़ी में भूमि आवंटन न होने से काम शुरू नहीं हुआ, वहीं एमओजी लाइन पर निर्माण आधा रुक गया है। शिक्षा विभाग के सिस्टम की विफलता के कारण फर्नीचर व अन्य सुविधाओं का अभाव है, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।