बुलंद सोच।

रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा की मौत, अस्पताल में महिला मरीज के चेहरे पर कीड़े रेंगने की घटना और इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कल्पना मिश्रा की मौत पर जिम्मेदार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर तत्काल कार्रवाई की बात कही। उन्होंने इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज को अनावश्यक बताते हुए अधिकारियों की नासमझी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री जी इस विषय पर सैद्धांतिक रूप से पहले ही तैयार थे और घटना के बाद उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मात्र दो सौ बच्चे थे तो यह सब करने की क्या जरूरत थी। उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति से अवगत कराया और सुबह 10:30 बजे बच्चों से मिलने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त करते हुए डॉक्टरों की मांग का समाधान निकालने को कहा।

पुलिस की वाटर कैनन और लाठीचार्ज की कार्रवाई पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं थी और कुछ अधिकारी-कर्मचारी उतनी परिपक्वता से चीजों को हैंडल नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने तत्काल निर्देश दिए हैं और फ्रंट में रहे दो संबंधित लोगों को जिनकी नासमझी के कारण ऐसी परिस्थिति बनी, उन्हें लाइन अटैच करने का आदेश हो गया है। एक निष्पक्ष जांच भी संस्थित कर दी गई है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विदेश में थे तब एक बार घटना के समय बातचीत हुई, फिर स्टाइपेंड बढ़ाने के संबंध में बात हुई और तीसरी बार फाइनल करने से पहले बात हुई। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही ऐसे निर्णय लिए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक महीने पहले हुई बात में भी मुख्यमंत्री सकारात्मक थे, लेकिन आंदोलन में वाटर कैनन और अन्य घटनाक्रम के बाद इसे तुरंत करने का निर्णय लिया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया
डॉक्टरों और अन्य हेल्थ केयर वर्कर्स की मांगों को लेकर भविष्य में आंदोलन की स्थिति न बने, इसके लिए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी संगठन के लोग उनके संपर्क में रहते हैं और वे बैठकों में अधिकारियों के साथ चर्चा कर समस्याओं का निराकरण करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ निर्णय मुख्यमंत्री जी के स्तर पर होते हैं, जो इस मामले में बहुत संवेदनशील और गंभीर हैं। वर्षों से लंबित अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता प्रशस्त हुआ है, जिसे एक बड़ा काम बताया।
कल्पना मिश्रा की दुखद मृत्यु पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कंसल्टेंट लेवल के डॉक्टर्स को पहली बार तत्काल सस्पेंड किया गया, फॉरमेलिटीज का इंतजार नहीं किया गया। जिम्मेदार नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई हुई और डीन व अधीक्षक को भी बदला गया। उन्होंने बताया कि इस तत्परता से कार्रवाई का उद्देश्य घटना के कारणों का पता लगाकर तह तक जाना था, लेकिन कांग्रेस के लोगों ने इस अवसर का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए राजनीति शुरू कर दी।

रीवा में एक अन्य महिला मरीज के चेहरे पर कीड़े रेंगने की घटना पर उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मीडिया में बताया गया कि महिला की पांच दिन पहले मृत्यु हो गई थी, लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद भी जब तक हार्ट चलता है, तब तक मृत घोषित नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस बीच कोई मक्खी, मच्छर जैसा उड़ने वाला जीव जंतु आया जिसके कारण यह परिस्थिति आई, जिसे नर्सों ने ठीक कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मिनट का वीडियो बनाकर संजय गांधी अस्पताल को बदनाम करने के लिए प्रचारित किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में प्रोटोकॉल होना चाहिए कि वार्ड और आईसीयू में अनावश्यक लोगों पर रोक लगे, क्योंकि भीड़ को बेवजह रोका जाता है तो वे स्टाफ से लड़ाई-झगड़े करते हैं।
कांग्रेस के आरोपों कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 2003 में कांग्रेस सरकार के समय 1000 प्रसूताओं में से 450 माताओं की मौत हो जाती थी। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार बनने के बाद सुधार के प्रयासों से 2023 में यह संख्या 173 हुई और बीते तीन सालों में घटकर 135 आ गई है, जिसका लक्ष्य अगला एनएफएचएस सर्वे आने तक 100 के नीचे पहुंचाना है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वे मातृ और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय दर से नीचे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं और किसी लापरवाही के कारण ऐसी घटना होती है तो उसे बिलकुल छोड़ा नहीं जा सकता।
उन्होंने विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कुशासन को जनता भूली नहीं है, चुनाव परिणामों से समझा जा सकता है कि 30 सीटों पर मात्र चार-पांच विधायक ही कांग्रेस के जीत पा रहे हैं। रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं पर कांग्रेस के सवालों पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि घोषित शातिर राजनीतिज्ञ यदि आरोप लगाएंगे तो जनता सब जानती है कि कौन कैसा है। उन्होंने कहा कि इससे एक ऐसा वातावरण बना कि इस प्रकार के तत्व अस्पतालों में जाने लगे और कहीं भी किसी की फोटो खींचने लगे।
रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि रीवा को मेडिकल हब बनाया जा रहा है और संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में इतना बड़ा डेवलपमेंट हो रहा है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने जानकारी दी कि 750 बेड के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल के लिए 450 करोड़ रुपए मंजूर कराए गए हैं, जहां बमुश्किल 200 बेड थे। 300 बेड का कैंसर हॉस्पिटल बनाया जा रहा है, जिसमें 100 करोड़ रुपए की मशीनें लगेंगी और टाटा कैंसर हॉस्पिटल मुंबई जैसी मशीनें रीवा में मंगाई गई हैं। बिल्डिंग बनकर तैयार हो रही है। रीवा में किडनी ट्रांसप्लांट हो रहा है, रोजाना दस से पंद्रह एंजियोप्लास्टी और बायपास सर्जरी हो रही हैं। इन परिस्थितियों के बाद भी स्वास्थ्य में अव्यवस्थाओं का सवाल उठाने वालों पर उन्होंने राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।
डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और बच्चों की मौत रोकने की नीति
एक विधायक के बयान पर कि खूबसूरत महिलाओं के शवों के साथ बलात्कार होता है, उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब व्यक्ति की सोच इतनी घिनौनी होती है तो वह उसके चेहरे पर और बातों में दिखती है। उन्होंने ऐसी बातों को गंभीरता से न लेने की बात कही।
छिंदवाड़ा और बालाघाट में बच्चों की मौतों जैसी घटनाएं रोकने के लिए नीति पर उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर और कंसल्टेंट्स के डेली रूटीन को समझा गया है। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स रोज ओपीडी में आते हैं, ओटी में जाते हैं, नियमित रूप से यूनिट में राउंड लेते हैं, मरीज देखते हैं, यूजी और पीजी स्टूडेंट्स की क्लास लेते हैं और शाम को यूनिट में राउंड लेते हैं। उपमुख्यमंत्री ने हेल्थ कमिश्नर के साथ विभागाध्यक्षों की बैठक में कहा था कि कंसल्टेंट्स के पास इतना व्यस्त रूटीन होता है कि उनके पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने के लिए समय नहीं होता।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्राइवेट प्रैक्टिस करेंगे तो मेडिकल कॉलेज के रूटीन कामों में कटौती होगी और इमेज खराब होगी। उन्होंने कहा कि जिस मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति हुई है, उसमें पूरा समय देना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मॉनिटरिंग भी करनी पड़ेगी और गंभीर मरीज होने पर ऑन कॉल कभी भी बुलाया जा सकता है। यह तभी हो पाएगा जब प्राइवेट प्रैक्टिस न की जाए, अन्यथा कार्रवाई और निलंबन भी होगा।
उन्होंने प्रमुख सचिव से ऐसा मैकेनिज्म बनाने को कहा है जिससे कभी भी यह देखा जा सके कि मेडिकल कॉलेज में किस वार्ड में किसका राउंड है और वे वहां उपस्थित हैं या नहीं। इससे उन्हें यह डर रहेगा कि कोई उन्हें देख रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई मरीज बहुत क्रिटिकल है और तमाम प्रयासों के बाद भी उसे नहीं बचाया जा रहा है, तो उसके परिजनों को स्वयं संतोष होना चाहिए कि डॉक्टरों ने बचाने की भरपूर कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कभी-कभार कैजुअल्टी होती हैं लेकिन उसके बाद भी मरीजों के परिजन यह कहते हैं कि डॉक्टरों ने अपनी तरफ से बचाने के लिए पूरा प्रयास किया।

