सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के बाद गुजरात सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रशासन, सुपरिटेंडेंट, पुलिस और डीन की मौजूदगी में पैनल और फोरेंसिक पोस्टमार्टम कराया गया है, ताकि मौत के हर पहलू की बारीकी से जांच हो सके। एंटी-रैगिंग कमेटी, सुपरिटेंडेंट और डीन रातभर सिविल अस्पताल में मौजूद रहकर यह पता लगाएंगे कि डॉक्टर के साथ रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न या किसी तरह की प्रताड़ना तो नहीं हुई थी।
मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 233 नए डेंटल सर्जन की नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ की है। MPPSC द्वारा चयनित इन डॉक्टरों को 10 अगस्त शाम 5 बजे तक विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन न करने पर नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी। पोस्टिंग जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से होगी। पति-पत्नी को एक ही जिले में पोस्टिंग का विकल्प भी मिलेगा, और गलत जानकारी या बिना सूचना के ड्यूटी पर न पहुंचने पर कार्रवाई की जाएगी।
शहडोल जिले के ब्यौहारी में स्वास्थ्य विभाग की टीम बुधवार को पैथालाॅजी सेंटरों की जांच के लिए पहुंची। कार्रवाई के डर से अधिकांश पैथालाॅजी संचालक अपने प्रतिष्ठान बंद कर फरार हो गए। ओम पैथालाॅजी के संचालक सुनील तिवारी बिना पंजीकरण और डिग्री के खून की जांच कर रहे थे। अस्पताल के पास संचालित कई पैथालाॅजी और एक्स-रे सेंटरों में अनियमितताएं पाई गईं। जिला स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने बिना कोई कार्रवाई किए ही लौटने का निर्णय लिया। नगरवासियों ने अवैध पैथालाॅजी के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की है, जहां अधिक शुल्क वसूला जा रहा है और रेट सूची प्रदर्शित नहीं है।
मुरैना जिले के पोरसा कस्बे में एंबुलेंस द्वारा प्याज की ढुलाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में सब्जी मंडी में प्याज की बोरियों से लदी दो एंबुलेंस दिखाई दे रही हैं, जो किसी अन्य शहर से आई थीं। मरीजों को समय पर एंबुलेंस न मिल पाने की शिकायतों के बीच यह घटना सामने आई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. पदमेश उपाध्याय ने मामले की जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि एंबुलेंस कहां से आईं और कहां गईं।
सतना जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में शुक्रवार को स्कूल की दो छात्राओं की मौजूदगी में एक पोस्टमॉर्टम किया गया। छात्राएं लगभग पौने दो घंटे तक मॉर्चुरी के भीतर रहीं, जहां मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर प्रतीक शुक्ला सहित चार अन्य लोग उपस्थित थे। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मॉर्चुरी एक प्रतिबंधित क्षेत्र है और नाबालिगों की उपस्थिति नियमों के विपरीत है। विभिन्न अधिकारियों ने इस मामले को अनुचित करार दिया है और जांच की बात कही है।
ग्वालियर के पूर्व सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव पिछले एक माह से सरकारी रिकॉर्ड में चिकित्सीय अवकाश पर हैं, लेकिन हाल ही में वे उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ल के ग्वालियर आगमन पर रेलवे स्टेशन पर सक्रिय रूप से मौजूद दिखे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पद से हटाए जाने के बाद जिला अस्पताल मुरार में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ डॉ. श्रीवास्तव की इस सार्वजनिक उपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि उनकी अनुपस्थिति से बच्चों का उपचार प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अब उनसे मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा है और मामले की जांच पर विचार कर रहा है।
मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में अब मैनेजमेंट कोटा नहीं रहेगा। एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश पुराने नियमों के तहत ही होगा, जिसमें 85% सीटें स्टेट कोटा और 15% एनआरआई कोटे से भरी जाएंगी। शासन ने 35% मैनेजमेंट कोटा पुनः शुरू करने के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह कोटा 2014 से बंद था। काउंसलिंग प्रक्रिया 5 अगस्त से पंजीयन के साथ शुरू होगी, जिसमें 19 शासकीय और 14 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 3600 एमबीबीएस इंटर्न्स ने आज से हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी मुख्य मांग मासिक स्टाइपेंड को 14 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करना है। हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन नियमित कामकाज प्रभावित होगा। इस बीच, पीजी डॉक्टर भी ओपीडी सेवाएं बंद करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की वरिष्ठता, नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव के मामले में राज्य सरकार और पीएससी से जवाब मांगा है। खंडवा निवासी डॉ. सोमपाल सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 1991 में पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद उनकी नियमित सेवा 1994 से मानी गई, जबकि एक अन्य डॉक्टर को बिना पीएससी उत्तीर्ण किए 1989 से लाभ मिला। इस विसंगति के कारण उन्हें पदोन्नति में नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने 1989 से वरिष्ठता तथा 2006 से प्रोफेसर पद का लाभ मांगा है।
भोपाल के सिविल अस्पताल गोविंदपुरा में खराब प्रदर्शन के चलते कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अस्पताल अधीक्षक की वेतन वृद्धि रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। अपेक्षा से कम डिलीवरी (केवल 44) और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में मात्र 4% बेड ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मुद्दे पर जिला पंचायत की सीईओ इला तिवारी ने चिंता जताई थी। कलेक्टर ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को नियमित समीक्षा और कमजोर प्रदर्शन पर कार्रवाई के निर्देश दिए।