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2026-10-17

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में छात्र संख्या पर चिंता, एमए हिंदी में केवल एक विद्यार्थी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल में वर्ष 2011 में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय का उद्देश्य हिंदी भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देना है। वर्तमान में, विश्वविद्यालय में हिंदी अध्ययन की स्थिति चिंताजनक है। एमए हिंदी पाठ्यक्रम में केवल एक विद्यार्थी ही अध्ययनरत है। सरकार इस विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष लगभग 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। स्थापना के बाद नौ साल तक विश्वविद्यालय पुराने विधानसभा भवन (मिंटो हाल) से संचालित होता रहा। अक्टूबर 2020 में इसे विदिशा रोड पर सूखी सेवनिया में पांच करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए नवनिर्मित परिसर में स्थानांतरित किया गया। नए परिसर में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति, छात्रावास और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इन सुविधाओं के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है, जिससे विश्वविद्यालय अपनी साख नहीं बना सका है। पिछले 15 वर्षों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 5207 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 4280 सीटों पर केवल 234 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।

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शिक्षक पदों की स्थिति

विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के 27 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 18 पदों के लिए वर्ष 2023 में भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, केवल 13 सहायक प्राध्यापकों की ही नियुक्ति हो पाई। शेष पदों पर अतिथि शिक्षकों को कार्य दिया गया है। अतिथि शिक्षकों को मिलाकर विश्वविद्यालय में कुल शिक्षकों की संख्या केवल 35 है।

विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले की स्थिति

विश्वविद्यालय में लगभग 68 पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। एमए भूगोल, अर्थशास्त्र और एमबीए जैसे पाठ्यक्रमों में भी एक-एक विद्यार्थी ही अध्ययनरत है। एमए इतिहास में तीन, एलएलएम में पांच और एमएफए में छह विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। वर्तमान प्रवेश आंकड़ों के अनुसार, सात ऐसे पाठ्यक्रम हैं जिनमें कोई विद्यार्थी नहीं है। इनमें एमएससी भौतिकी, एमएससी वनस्पतिशास्त्र, एमए योग, एमएससी रसायन, एमएससी कंप्यूटर और एमकॉम शामिल हैं, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या शून्य है। विभिन्न सत्रों में हुए प्रवेश की संख्या इस प्रकार है: 2026-27 में 234, 2025-26 में 174, 2024-25 में 287, 2023-24 में 366, 2022-23 में 237, 2021-22 में 366, 2021-20 में 288, 2020-19 में 438, 2019-18 में 438, 2018-17 में 525, 2017-16 में 615, 2016-15 में 493, 2015-14 में 311, 2014-13 में 375 और 2013-12 में 60।

कुलगुरु का वक्तव्य

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. डीए हिंडोलिया ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर तक आने-जाने के लिए बस की सुविधा न होना कम छात्र संख्या का एक बड़ा कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी समस्याओं को पहचान कर उनके समाधान के लिए जल्द प्रयास किए जाएंगे।