मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को केंद्र सरकार ने देश का नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति सोमवार देर रात नौकरशाही में हुए बड़े फेरबदल का हिस्सा है। इससे पहले, वह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव थीं। मुखर्जी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की सीईओ भी रह चुकी हैं, जहां उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उच्च शिक्षा सचिव के तौर पर उनके सामने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसी चुनौतियां होंगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उच्च शिक्षा विभाग ने तीन शासकीय कॉलेजों – शासकीय कन्या महाविद्यालय बासौदा (विदिशा), जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शुजालपुर (शाजापुर) और शासकीय महाविद्यालय सोयतकलां (आगर-मालवा) – में संस्कृत विषय की पढ़ाई को स्वीकृति दे दी है। इन संस्थानों में सत्र 2026-27 से संस्कृत पाठ्यक्रम संचालित होंगे।
जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद सितंबर में सरकारी और निजी कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे, जिससे करीब 12 साल बाद चुनावी माहौल लौटेगा। प्रदेश में आखिरी चुनाव 2016-17 में हुए थे। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अभी औपचारिक निर्देशों का इंतजार है, फिर भी छात्र संगठनों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। एबीवीपी और एनएसयूआई नए विद्यार्थियों से संपर्क कर रहे हैं, जबकि करणी सेना और जयस की छात्र विंग जैसे नए संगठनों के भी मैदान में उतरने की संभावना है। डीएवीवी के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने विश्वविद्यालय की तैयारियों की पुष्टि की है।
मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने सतना के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस.सी. राय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक छात्रा के साथ अनुचित वार्तालाप के आरोपों की जांच में प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद हुई। डॉ. राय पर पद के दुरुपयोग, अमर्यादित आचरण, स्वेच्छाचारिता और लापरवाही के आरोप हैं। निलंबन मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत किया गया है। इस मामले में कॉलेज की छात्रा से कथित आपत्तिजनक बातचीत का ऑडियो सामने आने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे। आगे विभागीय जांच की जाएगी।
सागर स्थित हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय ने बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के डीन प्रोफेसर श्री भगवत को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनकी अनुसूचित जाति आरक्षित पद पर नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र के फर्जी पाए जाने के बाद हुई। तथ्य-खोज समिति ने पाया कि प्रोफेसर भगवत उत्तर प्रदेश के बिंद समुदाय से हैं, जो वहां ओबीसी श्रेणी में आता है, और उनका एससी प्रमाण पत्र वैध नहीं है। विश्वविद्यालय ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए निलंबन किया। प्रोफेसर भगवत ने इसे प्रतिशोधात्मक बताया और उच्च न्यायालय जाने की बात कही।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) के सहायक कुलसचिव (स्थापना) हितेश कोडापे ने स्थापना विभाग के प्रभार से मुक्त होने के लिए आवेदन दिया है। उन्होंने पदोन्नति और वरिष्ठता सूची जारी करने को लेकर अनावश्यक दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। कोडापे ने 15 जुलाई को यह प्रभार संभाला था और तब से उन पर कर्मचारियों तथा अधिकारियों की पदोन्नति सूची के प्रकाशन का दबाव था। उन्होंने मानसिक दबाव महसूस करते हुए 6 अगस्त को कुलसचिव को आवेदन सौंपा, जिसे कुलगुरु कार्यालय भेज दिया गया है। राजभवन द्वारा 70 पदोन्नति पद निरस्त किए जाने के बाद से ही विश्वविद्यालय में पदोन्नति का मामला चर्चा में है।
प्रदेश सरकार ने सरकारी महाविद्यालयों में शिक्षा और छात्र सुविधाओं को बेहतर बनाने हेतु जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान-2026 के तहत, 7 अगस्त से 8 जनवरी 2027 तक सभी शासकीय महाविद्यालयों और छात्रावासों का प्रत्येक शुक्रवार नियमित निरीक्षण किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य शिकायतों का त्वरित समाधान, शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी और लोक सेवाओं का समयबद्ध प्रदाय सुनिश्चित करना है। निरीक्षण में शिक्षण गुणवत्ता, सुविधाओं और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी।
मध्य प्रदेश में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने सितंबर 2026 में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, कांग्रेस इसे अपने आंदोलन का परिणाम बता रही है, जबकि एबीवीपी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के रूप में देखा है। कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने 2016-17 के ‘गेट वेल सून’ आंदोलन का जिक्र किया, जिसके दौरान छात्र नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था। छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित कई बड़े नेता उभरे हैं।
मध्य प्रदेश में नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव सितंबर 2026-27 शैक्षणिक सत्र में प्रस्तावित हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में इसकी जानकारी दी। जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। कोर्ट ने पूर्व में सरकार को अकादमिक कैलेंडर और चुनाव प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा था। कोरोना महामारी और प्रशासनिक कारणों से चुनाव टलते रहे, जबकि छात्रों से शुल्क लिया जाता रहा। यह चुनाव छात्र राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रोफेसर डॉ. सोमपाल सिंह द्वारा दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को नियमितीकरण और पदोन्नति में कथित भेदभाव का सामना करना पड़ा है। डॉ. सिंह ने 1993 में एमपीपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन उन्हें 2008 से प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, जबकि एमपीपीएससी अनुत्तीर्ण एक अन्य प्रोफेसर को 2006 से पदोन्नति मिली। अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, और याचिका में उच्च शिक्षा विभाग तथा एमपीपीएससी के सचिव सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।