बुलंद सोच, दिल्ली।

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान तीन दिनों में 15 द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम सूची में दर्ज न होने वाली गलियारों में भी मुलाकातें हुईं।
इस शिखर सम्मेलन का वास्तविक हासिल घोषणापत्र के पैराग्राफ नहीं, बल्कि भारत मंडपम की वह मेज और उसके आसपास के वे गलियारे हैं, जहाँ आपस में टकराती धाराएँ एक ही छत के नीचे आईं।
मेजबान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की परीक्षा मंच पर कम और इन्हीं हाशिये पर ज्यादा हुई। ग्यारह सदस्यों के हित एक जैसे नहीं हैं।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, तथा पाकिस्तान और हिंद महासागर की प्रतिस्पर्धा जैसे सवाल मौजूद हैं। स्टिमसन सेंटर की यून सन इसे अभी सतही सुधार मानती हैं।
हालांकि, सतही सुधार भी एक सुधार है, यदि उसके पीछे एक साल का ठोस कार्यक्रम हो। यही इस शिखर सम्मेलन का व्यावहारिक निष्कर्ष है कि हर विवाद सैन्य तरीके से नहीं निपटता और मेज पर बने रहना भी एक रणनीति है।

