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2026-10-17

केंद्र सरकार का प्रस्ताव: फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन सहित चार दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

केंद्र सरकार ने फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन, गैबापेंटिन और कैरिसोप्रोडोल को दवा नियमों की अनुसूची एच1 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। आने वाले दिनों में ये दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी।

इन दवाओं को लेकर बिक्री और रिकॉर्ड रखने के नियम पहले से ज्यादा सख्त हो जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

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प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन दवाओं को खरीदना आसान नहीं रहेगा। हालांकि, डॉक्टर की पर्ची पर ये दवाएं मिलेंगी।

दवा दुकानदारों को इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसमें मरीज, डॉक्टर और दी गई दवा की जानकारी दर्ज करनी होगी।

असली निशाना बिना सलाह दवा खरीदने और गलत इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाना है।

दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने की पहल

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की औषधि परामर्श समिति ने इन चार दवाओं को अनुसूची एच1 में शामिल करने की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश को मंजूरी दी थी।

समिति के सामने इन दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे के लिए इस्तेमाल से जुड़ी चिंता रखी गई थी।

इन चारों दवाओं का असर सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। इसलिए इनका गलत या बिना निगरानी इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।

बहुत से जगहों पर इनका प्रयोग नशे के लिए भी होने लगा था।

दवाओं के उपयोग

फ्लूपेंरिक्सोल का उपयोग मानसिक बीमारियों, खासकर सिजोफ्रेनिया और लंबे समय से चल रही मानसिक समस्याओं के इलाज में होता है।

जोपिक्लोन नींद न आने की गंभीर समस्या में थोड़े समय के लिए दी जाने वाली दवा है।

गैबापेंटिन का इस्तेमाल मिर्गी के इलाज के अलावा नसों में होने वाले दर्द में भी होता है।

कैरिसोप्रोडोल मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द में थोड़े समय के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा है।