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2026-10-17

भोपाल मास्टर प्लान 2047 में 27% हरियाली का दावा कागजी, वास्तविक हरित क्षेत्र 16.22%

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

पिछले एक दशक में पहाड़ों में बसे भोपाल शहर में हरियाली का ग्राफ तेजी से कम हुआ है। शहर के भीतर विकास परियोजनाओं के नाम पर हजारों पेड़ों की बलि चढ़ चुकी है। हाल ही में मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी किया गया है।

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इस ड्राफ्ट में शहर के हरित क्षेत्र को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का दावा किया गया है। यह 1995 के प्लान के मुकाबले 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। हालांकि, विशेषज्ञ इस 27 प्रतिशत के दावे को मात्र कागजी बाजीगरी बता रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहर के भीतरी क्षेत्रों में आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों के टहलने व खेलने के लिए आवश्यक बगीचे और पार्क (जी-1 श्रेणी) एक प्रतिशत भी नहीं हैं। एक लाख हेक्टेयर से अधिक के योजना क्षेत्र में पार्कों का हिस्सा महज 0.66 प्रतिशत (670.93 हेक्टेयर) पर सिमट गया है।

राजपत्र में प्रकाशित भू-उपयोग तालिका 14.2 के अनुसार, 27 प्रतिशत का यह आंकड़ा पूरे योजना क्षेत्र (1,01,690 हेक्टेयर) का नहीं है। यह सिर्फ भाग-‘अ’ यानी 61,017 हेक्टेयर के दायरे पर आधारित है।

यदि पूरे 1,01,690 हेक्टेयर योजना क्षेत्र के हिसाब से देखा जाए, तो वास्तविक हरित क्षेत्र 14.45 प्रतिशत ही बैठता है। इसमें ईएसजेड (पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र) को मिलाकर यह केवल 16.22 प्रतिशत होता है।

योजना में दिखाए गए 14,698 हेक्टेयर ग्रीन क्षेत्र में से अकेले 9,208 हेक्टेयर, जो लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा है, नगर वन व वनीकरण (जी-5 श्रेणी) का है। इसमें वन विभाग के स्वामित्व वाली वह वन भूमि भी शामिल है जो दशकों से पहले से मौजूद है।

इसके अतिरिक्त, भोजताल प्रभाव क्षेत्र-1 और जल-निकायों के बफर जोन को भी ग्रीन एरिया में जोड़कर आंकड़े जुटाए गए हैं।

ड्राफ्ट में 45 लाख की अनुमानित आबादी के हिसाब से योजना बनाई गई है। इस आबादी के मुकाबले 670.93 हेक्टेयर पार्क क्षेत्र का सीधा अर्थ है कि एक नागरिक के हिस्से औसतन केवल 1.5 वर्ग मीटर पार्क आ रहा है, जो एक दरी बिछाने जितनी जगह भी नहीं है।

योजना में शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए किसी नए सेंट्रल या रीजनल पार्क का कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। बल्कि भानपुर खंती को पार्क श्रेणी में रखकर वहां गोल्फ कोर्स बनाने की बात कही गई है, जो आम जनता की पहुंच से बाहर है।

राष्ट्रीय अभिशासन एवं नगरीय प्रबंधन संस्थान, भोपाल के पूर्व निदेशक प्रो. (डा.) एचएम मिश्रा के अनुसार, मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप में 27 प्रतिशत हरियाली का दावा सिर्फ भाग-‘अ’ के 60 प्रतिशत दायरे की बाजीगरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे योजना क्षेत्र के सापेक्ष सही आंकड़े सामने रखने, ड्राफ्ट की तालिकाओं के विरोधाभास को सुधारने और गोल्फ कोर्स जैसे विकल्पों के बजाय घनी आबादी के बीच बड़े सार्वजनिक पार्कों के लिए स्थान आरक्षित करने की आवश्यकता है।