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केन-बेतवा लिंक परियोजना: पुनर्वास और मुआवजे को लेकर छतरपुर-पन्ना में विरोध जारी

केन-बेतवा लिंक परियोजना का मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में प्रभावित परिवारों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। इन परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में खामियां हैं। राज्य सरकार का दावा है कि विरोध सीमित है और प्रभावितों को नियमों के तहत आर्थिक सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह परियोजना बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है। परियोजना से 10.

एनजीटी का शाहपुरा तालाब के सीमांकन और मलबा हटाने का निर्देश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल के शाहपुरा तालाब और उसके बफर जोन के सीमांकन तथा अतिक्रमणों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने तालाब किनारे पड़े डीसिल्टिंग के मलबे को एक सप्ताह के भीतर हटाने का भी आदेश दिया है। नगर निगम, कलेक्टर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह में एनजीटी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। एनजीटी ने ‘नईदुनिया’ की एक रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए अतिक्रमण, जल गुणवत्ता और बिना शोधित गंदे पानी के प्रवाह जैसे मुद्दों पर सुनवाई की।

अकबरपुर में अवैध उत्खनन: सर्वे क्रमांक तीन की भूमि के सीमांकन के निर्देश

भोपाल के कोलार इलाके में दानिश हिल्स व्यू कॉलोनी के रहवासियों द्वारा अकबरपुर की शासकीय भूमि पर अवैध उत्खनन और पहाड़ी कटाई के आरोपों के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सर्वे क्रमांक तीन की भूमि के सीमांकन के निर्देश दिए हैं। एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व, वन, खनिज सहित संबंधित विभागों की टीम गठित कर जांच और आगे की कार्रवाई की जा रही है। रहवासियों ने पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई थी।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण का नदियों में दूध अर्पित करने पर प्रतिबंध से इनकार, पर्यावरणीय संतुलन पर बल

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने नदियों में दूध अर्पित करने को आस्था का विषय बताया है और इस पर प्रतिबंध से इनकार किया। हालांकि, एनजीटी ने चेतावनी दी कि हजारों लीटर दूध प्रवाहित करने से जल पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है, इसलिए आस्था और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन आवश्यक है। यह आदेश सीहोर जिले में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध बहाने की घटना के बाद आया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में तत्काल गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए, लेकिन विशेषज्ञों ने भविष्य में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ने से जलीय जीवों को खतरे की आशंका जताई।