बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल मेट्रो रेल कॉरिडोर के दोनों किनारों पर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) प्राप्ति क्षेत्र घोषित करने की सरकारी कवायद पर विवाद खड़ा हो गया है। संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) द्वारा इस संबंध में दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव की वैधानिकता, पारदर्शिता और औचित्य पर अपना विरोध दर्ज कराया। समिति के प्रतिनिधि विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने विभाग को औपचारिक आपत्ति सौंपी।
समिति ने बताया कि विभागीय दफ्तर अथवा वेबसाइट पर टीडीआर क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, प्रभावित खसरा नंबर और निर्माण मापदंड सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में आम नागरिक किस आधार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं, यह स्पष्ट नहीं है।
मास्टर प्लान में बदलाव का औचित्य
समिति ने सवाल उठाया कि जब शासन भोपाल विकास योजना-2047 तैयार करने की घोषणा कर चुका है, तब दो दशक पुराने मास्टर प्लान-2005 में इतना बड़ा फेरबदल करने का क्या औचित्य है।
समिति ने यह भी इंगित किया कि मेट्रो कॉरिडोर के दायरे में श्यामला हिल्स, अरेरा कॉलोनी ई-1 से ई-5, बड़े तालाब का कैचमेंट, संरक्षित वन व राजभवन जैसे संवेदनशील क्षेत्र आते हैं।
टीडीआर लागू होने से निर्माण घनत्व बढ़ेगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और यातायात पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।
समिति की मांगें
समिति ने मांग की है कि संबंधित क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन और पर्यावरण प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट पहले सार्वजनिक की जाए।
इसके साथ ही नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 23 के तहत राजपत्र में अनिवार्य प्रकाशन की प्रक्रिया की भी जांच की जाए।
समिति ने 2005 के प्लान में इस संशोधन को तुरंत निरस्त करने और इसे आगामी मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परामर्श के बाद ही शामिल करने की मांग रखी है।

