भोपाल मेट्रो रेल कॉरिडोर पर ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) लागू करने की सरकारी कवायद पर संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया है। समिति ने इस प्रस्ताव की वैधानिकता, पारदर्शिता और औचित्य पर सवाल उठाए हैं। उनके प्रतिनिधियों ने विभाग से विस्तृत नक्शा और प्रभावित खसरा नंबर सार्वजनिक करने की मांग की है। समिति ने कहा कि मास्टर प्लान-2005 में इस बड़े बदलाव से शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और यातायात पर दबाव पड़ेगा। उन्होंने 2005 के प्लान में संशोधन को निरस्त कर आगामी मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परामर्श के बाद शामिल करने की मांग की है।
इंदौर में मंगलवार को भूमिगत मेट्रो की खोदाई शुरू हो गई है, जिसमें टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘नर्मदा’ ने एयरपोर्ट स्टेशन से काम प्रारंभ किया। लगभग 102 मीटर लंबी और 6.65 मीटर व्यास वाली यह मशीन करीब 20 मीटर गहराई तक टनल तैयार करेगी। खोदाई से निकली मिट्टी को कन्वेयर और बाद में लोकोमोटिव व ट्रॉलियों के माध्यम से बाहर निकाला जाएगा। यह ईपीबी मिक्स शील्ड तकनीक पर आधारित है, जिसमें सुरक्षा के लिए गैस मानिटरिंग और इमरजेंसी स्टाप जैसी व्यवस्थाएं हैं। आसपास के भवनों की सुरक्षा के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन स्कीम भी लागू की गई है।
भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर का पहला पड़ाव, अल्पना तिराहा से आरा मशीन तक 500 मीटर की ट्विन टनल का 50 प्रतिशत काम छह माह में पूरा हो गया है। यह खोदाई जमीन से 24 मीटर नीचे टनल बोरिंग मशीन द्वारा की जा रही है। पहली टनल 270 मीटर और दूसरी 230 मीटर तैयार है। परियोजना का अंतिम लक्ष्य 2028 तक ऑरेंज और ब्लू लाइन को व्यावसायिक रूप से शुरू करना है। पहले चरण का शेष काम अगले तीन से चार माह में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद दूसरे चरण का काम शुरू होगा।
इंदौर में एयरपोर्ट से गांधी नगर तक मेट्रो ट्रेन निर्माण के कारण पिछले तीन महीनों से वन-वे किए गए मार्ग को अब दोनों तरफ से आवागमन के लिए खोल दिया गया है। इस मार्ग के वन-वे होने से वाहन चालकों को रोजाना चार किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता था, जिससे हजारों लोगों को परेशानी हो रही थी। दोपहिया वाहन चालकों द्वारा रांग साइड से आवागमन करने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ था। यातायात विभाग ने मेट्रो प्रबंधन को पत्र लिखकर दोनों तरफ से आवागमन की सुविधा मांगी थी, जिसके बाद मार्ग को खोल दिया गया है। इससे वाहन चालकों को बड़ी राहत मिली है और दुर्घटनाओं की आशंका समाप्त हो गई है।
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो टनल के नए अलाइनमेंट को लेकर रहवासियों में हड़कंप मच गया है। बंगाली चौराहे से पलासिया के बीच यह टनल अब कनाड़िया रोड के बजाय सघन कॉलोनियों और हजारों मकानों के नीचे से गुजरने की तैयारी में है। वंदना नगर, गोयल नगर, साईंनाथ कॉलोनी, तिलक नगर और संविद नगर में शुरू हुए मिट्टी परीक्षण से चिंतित निवासियों ने मेट्रो जीएम आरएस राजपूत से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। रहवासियों का तर्क है कि 200 फीट चौड़ी सड़क उपलब्ध होने पर भी हजारों मकानों की नींव को खतरे में क्यों डाला जा रहा है?
भोपाल में मेट्रो रेल ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के लिए ऐतिहासिक मिंटो हॉल के सामने दशकों पुराने पेड़ों को काट दिया गया था। अब इन पेड़ों के ठूंठों पर गमले रखकर हरियाली दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे ब्रिक्स सम्मेलन के विदेशी मेहमानों के लिए दिखावा बताया जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने इस पर चिंता व्यक्त की है, जबकि मेट्रो अधिकारियों ने आवश्यक वैधानिक अनुमतियां लेने और पुन: पौधारोपण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को देने की बात कही है।