बुलंद सोच, भोपाल।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर भोपाल नगर निगम ने पांच अगस्त को आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कारोबार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम प्रशासन ने इस दौरान शहरभर में 62 हजार से अधिक संपत्तियों को चिह्नित करने का दावा किया था। निगम ने शहर के सभी 21 जोन में 8,264 नोटिस जारी किए थे। 31 अगस्त से दो सितंबर तक प्रतिष्ठानों को सील और बंद कराने की कार्रवाई की गई। निगम ने शहरभर में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की, जिसमें से 183 प्रतिष्ठानों को स्वेच्छा से बंद कराने के पंचनामे बनाए गए और सात प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया।
विरोध के बाद रुकी कार्रवाई और शपथ-पत्र में बदलाव
शहर के व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई के विरोध में बड़े स्तर पर लगातार प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद नगर निगम ने कार्रवाई को रोक दिया। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पेश करने के लिए तैयार किए गए प्रारंभिक शपथ-पत्र में शहरभर में 7,951 प्रतिष्ठानों को आवासीय क्षेत्रों में कारोबार करते हुए चिह्नित करने और उन्हें नोटिस जारी करने की बात सामने आई थी। आंकड़ों के इस अंतर ने कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। नवदुनिया द्वारा इस विसंगति को सामने लाने के बाद निगम ने अपने रिकॉर्ड का दोबारा मिलान किया और शपथ-पत्र में कार्रवाई की जानकारी को लेकर बदलाव कर एक नया शपथ-पत्र न्यायालय के सामने पेश किया है।
प्रदेश सरकार की समिति पर भी सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां में नोटिस देने की कार्रवाई शुरू की थी। एक अगस्त को इन क्षेत्रों में दो प्रतिष्ठानों को सील किया गया था और 99 प्रतिष्ठानों के स्वेच्छा से बंद करने के पंचनामे बनाए गए थे। दो अगस्त को प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक समिति गठित कर दी थी, जिसके बाद निगम ने अपनी कार्रवाई रोक दी और बंद किए गए प्रतिष्ठान भी खुल गए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा बनाई गई इस समिति को प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए समिति गठित करने के मूल दस्तावेज पेश करने को कहा था। अब 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ ही प्रदेश सरकार की इस समिति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

