भोपाल नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शहर में लगभग 1 लाख रिहायशी संपत्तियों का सर्वे कर रहा है, जहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी किए जाएंगे और संपत्तियाँ सील हो सकती हैं। निगम को 15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट देनी है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मास्टर प्लान लागू न होने को इस स्थिति का कारण बताया है। व्यापारियों का कहना है कि इन व्यवसायों के बंद होने से 5 लाख से अधिक लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है, जबकि ये संस्थान करोड़ों का राजस्व भी दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल में 60 से 80 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। इन प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई न होने पर अदालत की अवमानना होगी, जबकि इन्हें बंद करने से लगभग 5 लाख लोगों का रोजगार संकट में आ सकता है। राज्य सरकार नए मास्टर प्लान में व्यावहारिक समाधान तलाश रही है। भोपाल का मास्टर प्लान 2005 में समाप्त हो गया था, जिससे शहर की व्यावसायिक जरूरतें अनियोजित रूप से बढ़ीं। नए प्लान में प्रमुख सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति और आवासीय क्षेत्रों का मूल स्वरूप बनाए रखने पर विचार हो रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल के रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स्तर पर गठित 10 सदस्यीय समीक्षा समिति को भंग कर दिया और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दुकान संचालकों को दी गई राहत (स्टे ऑर्डर) को भी निरस्त कर दिया। नगर निगम की रिपोर्ट में 100 दुकानों को सील करने के दावे के मुकाबले केवल दो दुकानें सील होने का खुलासा होने पर न्यायालय ने फटकार लगाई। भोपाल नगर निगम को वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए पांच सप्ताह का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
भोपाल में आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा गरमाया हुआ है, जिसमें नगर निगम की तीन प्रमुख शाखाओं – भवन अनुज्ञा, राजस्व और श्रम विभाग – की मिलीभगत सामने आई है। नवदुनिया की पड़ताल के अनुसार, राजस्व अधिकारियों ने आवासीय भूखंडों पर नाममात्र शुल्क पर ट्रेड लाइसेंस जारी किए, जबकि गुमास्ता बिना स्थल निरीक्षण के ही बन गए। मुख्यमंत्री के बयान के बाद अरेरा कॉलोनी में व्यापारियों ने दुकानें खोलीं, लेकिन निगम कार्यालय के सामने एक दुकान बंद मिली। भोपालवासी इन अवैध गतिविधियों से आक्रोशित हैं और नेताओं को चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी दे रहे हैं।
भोपाल के गौतम नगर में रविवार को संयुक्त रहवासी संघ के बैनर तले ‘सिटीजन वॉक’ का आयोजन किया गया, जिसमें आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध किया गया। रचना नगर, शाहपुरा और अरेरा कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों के नागरिक अवैध निर्माण हटाने और व्यवसाय बंद कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम की 38 कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अपर्याप्त बताया। उन्होंने संकल्प लिया कि अवैध कारोबार का समर्थन करने वाले जनप्रतिनिधियों का आगामी चुनाव में विरोध किया जाएगा।