बुलंद सोच, भोपाल।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और निर्माण में खर्च को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल भाजपा और संघ के कार्यालय बनाने के साथ-साथ चुनावी गतिविधियों में भी किया गया। दिग्विजय सिंह ने मंदिर में मिले दान में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि नकद और सोने-चांदी को मिलाकर करीब 200 से 300 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर से जुड़े आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मंदिर निर्माण की लागत को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस निर्माण की लागत करीब 800 करोड़ रुपये बताई गई थी, वह बढ़कर 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 1989 में हुए राम शिला पूजन के दौरान जुटाए गए करीब 1400 करोड़ रुपये और चांदी की ईंटों का हिसाब भी सार्वजनिक करने की मांग की।
'सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा' की घोषणा
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 1000 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करने जा रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ नाम दिया है। इस यात्रा का उद्देश्य धर्म को राजनीति का साधन बनाने और धर्म के नाम पर आर्थिक लाभ लेने वालों के खिलाफ आवाज उठाना है। 80 साल की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा करने के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उम्र भले ही 80 साल है, लेकिन वह खुद को 50 साल का महसूस करते हैं। उन्होंने सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इनके कारण सनातन धर्म की मूल भावना को नुकसान पहुंचा है।
भाजपा का पलटवार
दिग्विजय सिंह के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं। सारंग ने राम मंदिर जैसे आस्था से जुड़े विषय पर इस तरह के बयान देने को करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना तथ्य और प्रमाण के नहीं लगाए जाने चाहिए। यदि दिग्विजय सिंह के पास आरोपों से जुड़े सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। सारंग ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण धार्मिक भावनाएं भड़काने और समाज में भ्रम फैलाने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

