BREAKING NEWS
2026-10-17

रातापानी टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में 90 ईंट भट्ठे, NGT ने निगरानी तंत्र पर उठाए सवाल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

रातापानी टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव ज़ोन में 90 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। ये भट्ठे नासीपुर, बमनई, करमई, जौंदरा, कुकाखो और बीरान सहित विभिन्न गांवों में चल रहे हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रातापानी वन्यप्राणी अभयारण्य के अधीक्षक की रिपोर्ट में सामने आई है।

Advertisement

निगरानी तंत्र पर एनजीटी के सवाल

बड़ी संख्या में इन ईंट भट्ठों के संचालन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने पर एनजीटी ने निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अधिकरण ने कहा है कि ईको-सेंसिटिव ज़ोन मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर और सदस्य सचिव डीएफओ ने भट्ठों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए अपने अधिकारों का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं किया। एनजीटी ने अब रायसेन कलेक्टर, ईको-सेंसिटिव ज़ोन मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष, डीएफओ और समिति के सदस्य सचिव तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवैध रूप से संचालित भट्ठों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

बिना अनुमति के चल रहे भट्ठे

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि 11 अगस्त 2017 की ईको-सेंसिटिव ज़ोन अधिसूचना के तहत ईंट भट्ठों का संचालन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इनका संचालन जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि इन भट्ठों के पास वन विभाग की वैध अनुमति नहीं है और जल एवं वायु प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक सहमति भी प्राप्त नहीं की गई है।

एनजीटी का स्वत: संज्ञान और अगली सुनवाई

ग्राम पंचायत बमनई के सरपंच की ओर से 14 नवंबर 2025 को एनजीटी को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें रातापानी के बफर क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण फैलाने वाले ईंट भट्ठों को बंद कराने की मांग की गई थी। एनजीटी ने इस पत्र पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की। इस मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।