बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर के लोको स्थित बीमा अस्पताल में इलाज की व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल की डायग्नोस्टिक सेवाएं अब भी अधूरी हैं।
अस्पताल में छाती, हड्डी और अन्य बीमारियों से संबंधित एक्स-रे रिपोर्ट जारी करने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, सोनोग्राफी की सुविधा के लिए भी मरीजों को अन्य सरकारी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
परिणामस्वरूप, बीमित श्रमिकों को सामान्य जांच के लिए भी सिविल अस्पताल हजीरा या जयाआरोग्य अस्पताल (जेएएच) जाना पड़ रहा है।
यदि उपचार के दौरान डॉक्टर एक्स-रे या सोनोग्राफी की सलाह देते हैं, तो जांच कराने के बाद रिपोर्ट तैयार कराने में समस्या आती है।
रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मरीजों को हजीरा सिविल अस्पताल या जेएएच रेफर किया जाता है। इन अस्पतालों में पहले से ही मरीजों का दबाव और जांचों की लंबी प्रतीक्षा सूची रहती है।
बीमा अस्पताल से भेजे गए मरीजों को घंटों कतार में लगकर जांच करानी पड़ती है। रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें दोबारा लोको स्थित बीमा अस्पताल लौटना पड़ता है, जिससे उनका उपचार प्रभावित होता है और अतिरिक्त समय भी खर्च होता है।
मई 2026 में राज्य सरकार से केंद्र सरकार को पूर्ण रूप से हैंडओवर होने के बाद लोको स्थित बीमा अस्पताल के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज हुई है।
अस्पताल में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियां की जा चुकी हैं और मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया भी चल रही है। इससे अस्पताल में उपचार सुविधाओं में वृद्धि होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और मेडिकल स्टाफ की भर्ती से उपचार व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के बिना एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी आवश्यक सेवाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।
रेडियोलॉजिस्ट के पद के लिए या तो पर्याप्त आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं या चयनित उम्मीदवार ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।
इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है, क्योंकि अस्पताल में एक्स-रे जैसी प्राथमिक जांच उपलब्ध होने के बावजूद, उसकी विशेषज्ञ रिपोर्ट के लिए मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ रहा है।

