ग्वालियर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके स्वजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतें सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं, फिर भी गजराराजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अस्पताल की पांच में से तीन लिफ्ट खराब हैं, जबकि कई फ्लोर पर फाल्स सीलिंग क्षतिग्रस्त है और उसके गिरने का खतरा बना हुआ है। मरीजों से महंगी फीस वसूली जाती है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। मरम्मत के प्रस्ताव फाइलों में लंबित हैं, जिससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने गुजरात में चांदीपुरा वायरस के संक्रमण की जांच और तैयारियों को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय टीम भेजी है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि टीम राज्य के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर बीमारी को समझने, इसके फैलाव को रोकने और इलाज के तरीकों पर काम कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी गुजरात और राजस्थान में राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल भेजा है।
शहडोल जिले के ब्यौहारी में स्वास्थ्य विभाग की टीम बुधवार को पैथालाॅजी सेंटरों की जांच के लिए पहुंची। कार्रवाई के डर से अधिकांश पैथालाॅजी संचालक अपने प्रतिष्ठान बंद कर फरार हो गए। ओम पैथालाॅजी के संचालक सुनील तिवारी बिना पंजीकरण और डिग्री के खून की जांच कर रहे थे। अस्पताल के पास संचालित कई पैथालाॅजी और एक्स-रे सेंटरों में अनियमितताएं पाई गईं। जिला स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने बिना कोई कार्रवाई किए ही लौटने का निर्णय लिया। नगरवासियों ने अवैध पैथालाॅजी के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की है, जहां अधिक शुल्क वसूला जा रहा है और रेट सूची प्रदर्शित नहीं है।
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) लैब की स्थापना अंतिम चरण में है। यह लैब किडनी, लीवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले होने वाली महत्वपूर्ण एचएलए मैचिंग जाँच की सुविधा स्थानीय स्तर पर प्रदान करेगी। वर्तमान में ग्वालियर-चंबल अंचल के मरीजों को यह जाँच कराने के लिए दिल्ली या भोपाल जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों का अपव्यय होता है। इस लैब के शुरू होने से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रस्तावित किडनी ट्रांसप्लांट सेवा को भी लाभ मिलेगा, जिससे जीआरएमसी मध्य भारत में ट्रांसप्लांट सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल को लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) नरेंद्र कोटवाल के रूप में नया कार्यकारी निदेशक मिल गया है। केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी तीन साल के लिए नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी और वे 70 वर्ष की आयु पूरी होने या अगले सरकारी आदेश तक पद पर रहेंगे। कोटवाल की नियुक्ति लेवल-15 के वेतन मैट्रिक्स में अनुबंध के आधार पर की गई है। उनके पास चिकित्सा और सैन्य चिकित्सा प्रशासन का लंबा अनुभव है।
ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) और गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के लिए 1000 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत हो गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इस योजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना ग्वालियर को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और शोध का केंद्र बनाएगी। दिल्ली के विशेषज्ञ और बीडीसी की टीम द्वारा तैयार इस प्लान में नए भवनों के निर्माण, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। इससे हजारों मरीजों और मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने होम्योपैथों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने वाले सरकारी फैसले के विरोध में राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। एमएआरडी ने अदालत के अंतिम फैसले तक बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि बातचीत विफल रही है और 24 घंटे बाद आपातकालीन सेवाएं भी बंद हो सकती हैं। कई अन्य चिकित्सा संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है।
भोपाल में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के डॉक्टर अवैध रूप से एलोपैथिक दवाएं लिख रहे हैं, इंजेक्शन लगा रहे हैं और मामूली सर्जरी भी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में है। नवदुनिया की पड़ताल में सुंदर नगर, सेमरा कलां और सुभाष कॉलोनी में ऐसे कई मामले सामने आए। भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए एक चार सदस्यीय जांच टीम गठित करने और अनियमितता मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने अवैध दवाओं के प्रयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों पर भी प्रकाश डाला।
मध्य प्रदेश में दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने ‘यू कोट, वी पे’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन में सबसे कम वेतन मांगने वाले रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञों को पदस्थ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 14 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति दी है, जिनमें से छह आदिवासी बहुल जिलों में बनाए जाएंगे। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कॉलेज के प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति दी है, जिसका उद्देश्य सरकारी चिकित्सा में सटीक और सुरक्षित सर्जरी प्रदान करना है। पहले चरण में यह सुविधा स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआई) में शुरू होगी। हालांकि, कॉलेज की 2 करोड़ रुपये की ई-म्यूजियम परियोजना को अभी विभागीय मंजूरी का इंतजार है। रोबोटिक सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है जिसमें प्रशिक्षित सर्जन रोबोटिक भुजाओं को नियंत्रित कर जटिल ऑपरेशन करते हैं, जिससे रिकवरी तेज होती है।