छिंदवाड़ा में रेबीज से जूझ रही 45 वर्षीय महिला की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों को उसके संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी, जिससे अस्पताल में हड़कंप मच गया। संपर्क में आए डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और परिजनों को एहतियातन रेबीज रोधी टीके लगाए गए। महिला को तीन महीने पहले कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने टीका नहीं लगवाया था, जिससे संक्रमण बढ़ गया था।
भोपाल के सिद्धांता रेडक्रास सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और सृष्टि हॉस्पिटल को आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से निलंबित कर दिया गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने योजना में अनियमितताएं मिलने पर यह कार्रवाई की, जिसमें अस्पतालों के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल की जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद यह कदम उठाया गया। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने बताया कि दोनों अस्पतालों के खिलाफ पहले मिली शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है, और अनियमितताओं पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
एम्स भोपाल और सिप्ला फाउंडेशन ने गंभीर और जीवन-सीमित बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर तथा सम्मानजनक उपशामक देखभाल प्रदान करने हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत भोपाल सहित मध्य भारत में उपशामक देखभाल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। इसमें मरीजों को दर्द से राहत, मानसिक और भावनात्मक सहयोग प्रदान करना शामिल है। एम्स भोपाल की उपशामक देखभाल इकाई के प्रभारी डॉ. अनुज जैन के अनुसार, समझौते से आम लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही, घर पर उपशामक देखभाल की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा।
ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज स्थित वायरोलॉजी लैब में हुई जांच में एक महिला स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाई गई है। यह महिला छतरपुर जिले की निवासी है और जेएएच में चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित जिले को इसकी सूचना भेज दी है। इससे पूर्व 10 संदिग्धों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। वहीं, मौसम में बदलाव और वायरल संक्रमण के कारण अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। सोमवार को कुल 3865 मरीज ओपीडी पहुंचे, जिनमें मेडिसिन विभाग में सर्वाधिक 740 मरीज शामिल थे।
इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों ने ‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ की मांग और भोपाल में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं और सैकड़ों मरीज परेशान हैं। चिकित्सक देशभर में समान मानदेय व्यवस्था लागू करने और भोपाल में बल प्रयोग करने वाले दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि वैकल्पिक व्यवस्था कर ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रखी गई हैं तथा वरिष्ठ चिकित्सकों को तैनात किया गया है।
मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का तीन दिवसीय आंदोलन सरकार द्वारा स्टाइपेंड में 50% वृद्धि की घोषणा के बाद समाप्त हो गया है। अब इंटर्न डॉक्टरों को प्रतिमाह 21,500 रुपये मिलेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने यह घोषणा की, जिसके बाद डॉक्टरों ने आभार व्यक्त किया। आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है और उच्च स्तरीय जांच के लिए टीम गठित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दुबई से लगातार संपर्क में थे।
धार के निसरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां बुधवार को चार गर्भवती महिलाओं को एक्सपायरी आईवी सेट से बोतल चढ़ाई गई। इन आईवी सेट की एक्सपायरी मई 2026 में हो चुकी थी, लेकिन इनका इस्तेमाल करीब चार महीने बाद भी किया जा रहा था। नईदुनिया टीम के पहुंचने और सवाल पूछने पर कर्मचारियों ने एक्सपायरी सामग्री को समेटना शुरू कर दिया। यह घटना अस्पताल में चिकित्सा सामग्री के रखरखाव और निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाती है। बीएमओ डॉ. जितेंद्र दूधी ने साप्ताहिक निरीक्षण का दावा किया लेकिन मामले की जांच की बात कही।
आयुष्मान भारत निरामयम योजना में 1 अक्टूबर से नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) प्रमाणपत्र अनिवार्य हो गया है। इससे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लगभग 300 निजी अस्पतालों की संबद्धता प्रभावित हो सकती है। यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन ने लंबित भुगतानों और अतिरिक्त खर्च को लेकर आपत्ति जताई है और 8 अक्टूबर से योजना का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। सीईओ ने बताया कि यह शर्त गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के लिए है।
केरलम के तिरुवनंतपुरम में नौ वर्षीय बच्ची के पेट और छोटी आंत से एक किलोग्राम बालों का गुच्छा सर्जरी द्वारा निकाला गया। बच्ची ‘रैपुन्जेल सिंड्रोम’ से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ स्थिति है जिसके दुनिया भर में 100 से भी कम मामले सामने आए हैं। नेय्याट्टिनकारा स्थित निम्स मेडिसिटी में हुई इस सफल सर्जरी के बाद बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया। उसे लगातार पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था, और जांच में आंत में गंभीर रुकावट तथा बालों का गुच्छा पाया गया। डॉ. बीजू आई जी नायर की देखरेख में यह जटिल सर्जरी हुई।
ग्वालियर के लोको स्थित बीमा अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण डायग्नोस्टिक सेवाएं अधूरी हैं। एक्स-रे और सोनोग्राफी रिपोर्ट जारी करने के लिए विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को सिविल अस्पताल हजीरा या जयाआरोग्य अस्पताल जाना पड़ रहा है। इन अस्पतालों में लंबी कतारों और अतिरिक्त समय की समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे उपचार भी प्रभावित होता है। अस्पताल के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज हुई है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियां भी हुई हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि पद के लिए पर्याप्त आवेदन नहीं मिले या चयनित अभ्यर्थी ने ज्वाइन नहीं किया।