मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकास खंड में रहस्यमय बुखार से दो माह में आठ बच्चों की मौत हो गई है, जबकि सात बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। डॉक्टरों ने शुरुआत में मलेरिया की जांच की, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। राज्य मुख्यालय से आई विशेषज्ञ टीम भी बीमारी का पता लगाने में विफल रही। पूर्व मुख्यमंत्रियों कमल नाथ और दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर उचित जांच और सहायता की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 93 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
ग्वालियर के मोतीझील में रविवार शाम 12 वर्षीय सुमन यादव पर एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। बच्ची गाय को रोटी खिला रही थी तभी कुत्ते ने उसके हाथ और पैर में गहरे जख्म कर दिए। परिजन उसे तत्काल माधव डिस्पेंसरी ले गए जहां प्राथमिक उपचार मिला। सोमवार को उसे हजार बिस्तर अस्पताल में रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया और बाद में मरहम पट्टी कर घर भेज दिया गया। इसी दिन जयारोग्य अस्पताल में कुत्ते के काटने के 103 मामले सामने आए, जिनमें 31 नए थे।
ग्वालियर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाओं के कारण मरीजों और उनके स्वजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतें सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी हैं, फिर भी गजराराजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अस्पताल की पांच में से तीन लिफ्ट खराब हैं, जबकि कई फ्लोर पर फाल्स सीलिंग क्षतिग्रस्त है और उसके गिरने का खतरा बना हुआ है। मरीजों से महंगी फीस वसूली जाती है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। मरम्मत के प्रस्ताव फाइलों में लंबित हैं, जिससे प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बैतूल जिला अस्पताल में 84.98 लाख रुपये की लागत से निर्मित 30 बिस्तरों का विश्रामालय लोकार्पण के तीन माह बाद भी बंद है। मई में जनप्रतिनिधियों द्वारा लोकार्पित यह भवन मरीजों के स्वजन के लिए बनाया गया था, लेकिन संचालन प्रक्रिया स्पष्ट न होने के कारण इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। दूरदराज से आने वाले मरीजों के परिजन ठहरने की समस्या से जूझ रहे हैं और अस्पताल के बरामदों या फर्श पर रात बिताने को मजबूर हैं। आरएमओ डॉ. रानू वर्मा के अनुसार, संचालन के दिशा-निर्देशों का इंतजार है और कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा गया है।
ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) और गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) के लिए 1000 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान सैद्धांतिक रूप से स्वीकृत हो गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इस योजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना ग्वालियर को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और शोध का केंद्र बनाएगी। दिल्ली के विशेषज्ञ और बीडीसी की टीम द्वारा तैयार इस प्लान में नए भवनों के निर्माण, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार और आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। इससे हजारों मरीजों और मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा।
इंदौर के 83 करोड़ की लागत से बने नए जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को इसका शुभारंभ किया था, लेकिन यह पूरी क्षमता से चालू नहीं हो पाया है। वर्तमान में केवल 50 बेड और प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। परिजनों को खुद स्ट्रेचर ढोना पड़ रहा है, पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है, लिफ्ट बंद पड़ी है और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की कमी के कारण तैयार वार्डों में मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं।
मुरार जिला अस्पताल के अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर का एसी पिछले छह दिनों से खराब है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में बाधा आ रही है। आउटडोर मोटर जलने के कारण पूरा सिस्टम ठप है, और इस खराबी को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। डॉक्टरों को पसीने में सर्जरी करनी पड़ रही है, जिससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। आर्थोपेडिक सर्जरी सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं, जिससे ऑपरेशन की वेटिंग बढ़ गई है और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिविल सर्जन ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई है।
ग्वालियर के जयाआरोग्य अस्पताल समूह के हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को स्टेशनरी की कमी के कारण परेशानी हो रही है। सर्जरी विभाग में भर्ती के दौरान मरीजों के स्वजनों से एक निर्धारित फॉर्म की दो से तीन फोटोकॉपियां बाहर से कराकर लाने को कहा जा रहा है, जिस पर 20 से 40 रुपये का खर्च आता है। मरीज के परिजन पंकज ने बताया कि यह प्रक्रिया लगभग हर भर्ती मरीज के साथ अपनाई जा रही है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने इस मामले की जानकारी मिलने पर जांच और व्यवस्था बंद कराने की बात कही है।
भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने निरामय अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण के आरोप में सील कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) मनीष शर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के उल्लंघन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद औचक निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। नियमानुसार अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया जाएगा। विभाग ने अवैध लिंग परीक्षण और कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाने की बात कही है, जिससे शहर के निजी अस्पतालों में हड़कंप है।
पन्ना जिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में पिछले एक महीने में जन्म से लेकर एक वर्ष तक की उम्र के 22 बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है। इन लगातार हो रही मौतों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, इलाज की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजेश प्रसाद तिवारी ने SNCU वार्ड का निरीक्षण कर उपचार व्यवस्थाओं, संसाधनों और स्टाफ की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि अधिकांश बच्चे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के साथ रेफर होकर आते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और जांच रिपोर्ट का इंतजार है।