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कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकला चीता जंगल लौटने में कर रहा देरी, भीड़ और शोर-शराबा बन रहा बाधा

कूनो नेशनल पार्क से करीब 10 दिन पहले बाहर निकला एक चीता मानपुर और सोंईकलां इलाके में है। यह जंगल वापस लौटना चाह रहा है, लेकिन रास्ते में इंसानी भीड़ और शोर-शराबे के कारण भयभीत होकर बार-बार रास्ता बदल रहा है। चीता ट्रेकिंग टीम उस पर लगातार नजर रख रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान और किसानों द्वारा खदेड़े जाने के बाद उसने अपना रास्ता बदला। पिछले तीन दिनों से उसने कोई शिकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र के किसान डरे हुए हैं और खेतों में जाने से बच रहे हैं।

बालाघाट: खैरलांजी के जंगल में बाघ के हमले से किसान की मौत, दो मवेशी भी शिकार बने

बालाघाट जिले के खैरलांजी वन परिक्षेत्र के पांढरवानी गांव में बाघ के हमले से 50 वर्षीय किसान देवकराम बाघमारे की मौत हो गई। रविवार दोपहर मवेशी चराने जंगल गए देवकराम का शव सोमवार सुबह खून से लथपथ अवस्था में एक मृत गाय और बछड़े के पास मिला। घटनास्थल पर बाघ के पंजों के निशान मिले हैं, जिससे हमले की पुष्टि हुई। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत है। वन विभाग ने मृतक के परिजनों को 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की और क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने उचित मुआवजे की मांग की है।

पन्ना टाइगर रिजर्व में पी-141 की युवा बाघिन ‘भविष्य की रानी’ के रूप में उभर रही

पन्ना टाइगर रिजर्व में आगामी पर्यटन सीजन वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचक रहने वाला है। बाघों की नई पीढ़ी लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, जिसमें पी-652 के नए शावकों के बाद अब पी-141 की उप-वयस्क बेटी ने ध्यान खींचा है। इस युवा बाघिन को पन्ना की ‘भविष्य की रानी’ के रूप में देखा जा रहा है, जो जल्द ही अपना स्वतंत्र क्षेत्र स्थापित कर सकती है। पन्ना की सफल बाघ पुनर्स्थापना कहानी के कारण यह नई पीढ़ी महत्वपूर्ण है, हालांकि उसे क्षेत्र स्थापित करने और शिकार खोजने जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना होगा। पर्यटक इस पर विशेष नजर रखेंगे।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में होमस्टे की आड़ में आलीशान रिसॉर्ट निर्माण, आईएएस अधिकारी पर आरोप

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक आलीशान रिसॉर्ट के निर्माण में नियमों की अनदेखी और शासन को गुमराह करने का आरोप है। गुरुग्राम के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार पर होमस्टे की अनुमति की आड़ में प्रतिबंधित वनभूमि पर रिसॉर्ट बनाने का आरोप है। राजगढ़ गांव के खसरा नंबर 1841 की यह भूमि वन्यजीव गलियारे का हिस्सा बताई जा रही है, जिससे वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ गया है। वन विभाग ने निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी थी। डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

आलीराजपुर में रिहायशी इलाके के कुएं में गिरा तेंदुआ, वन विभाग ने सुरक्षित बचाया

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले की ग्राम पंचायत कवटू में एक तेंदुआ रविवार रात जंगल से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। मुर्गे का शिकार करने के बाद भागते समय संतुलन बिगड़ने से वह सोमवार सुबह एक खुले कुएं में जा गिरा। ग्रामीणों द्वारा सूचना मिलने पर जोबट वन परिक्षेत्राधिकारी सुनील मुजाल्दे के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू किया। विभाग ने स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की मौजूदगी और इंसानों पर हमले की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर संयुक्त बैठक का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग के जंगल क्षेत्र से फोरलेन सड़क निकालने के मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), केंद्रीय सड़क परिवहन विभाग और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को संयुक्त बैठक कर रास्ता निकालने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा और सड़क दुर्घटनाओं के खतरे संबंधी मुद्दों पर गौर किया। पूर्व में कोर्ट ने एनटीसीए की 10.

बांधवगढ़ में जंगली हाथियों ने बनाया ठिकाना, जैव विविधता हुई समृद्ध

बांधवगढ़ नेशनल पार्क जंगली हाथियों का नया ठिकाना बन गया है, जहां 70 से अधिक हाथी पिछले आठ सालों से रह रहे हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड से आए इन हाथियों ने पार्क की जैव विविधता को समृद्ध किया है, जबकि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में ये चुनौती बने हुए हैं। विशेषज्ञ बांधवगढ़ में ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ शुरू करने की वकालत कर रहे हैं ताकि हाथियों की सुरक्षा हो सके और हाथी-मानव द्वंद्व समाप्त हो। यह प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को शिक्षित करने, रोजगार सृजित करने और वन्यजीवों के संरक्षण में सहायक होगा।

मध्य प्रदेश में बाघ-मानव संघर्ष बढ़ा, जनवरी से अब तक 50 ग्रामीण और 45 से अधिक बाघों की मौत

मध्य प्रदेश में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष चिंता का विषय बन गया है। इस वर्ष जनवरी से अब तक 50 ग्रामीणों की मौत वन्यजीवों के हमलों में हुई है, जबकि 2026 के शुरुआती 8 महीनों में 45 से अधिक बाघ भी मारे गए हैं। ग्रामीण महुआ, जलाऊ लकड़ी और तेंदू पत्ता बीनने जैसे कार्यों के लिए जंगल में जाते हैं, जिससे वन्यजीवों से आमना-सामना का खतरा बढ़ता है। सरकार ने पांच साल में मुआवजे के तौर पर 88.38 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है, जिसमें 2024-25 में 20.05 करोड़ रुपये से अधिक शामिल हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या 980 होने का अनुमान है, जबकि 2022 की गणना में यह 785 थी।

शिवपुरी में सड़क पर आया 6 फीट लंबा मगरमच्छ, वन विभाग ने सुरक्षित पकड़ा

शिवपुरी में शुक्रवार देर रात हल्की बारिश के बाद स्टेडियम के पास एक तालाब से निकलकर करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ सड़क पर आ गया। इस घटना से राहगीरों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया, और वे बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़कर एक सुरक्षित स्थान पर ले गई। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने के कारण मगरमच्छों का बाहर आना सामान्य है, और उनसे दूरी बनाए रखना महत्वपूर्ण है। पिछले साल भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं।

ग्वालियर के शिक्षानगर स्कूल में मध्य प्रदेश का पहला ‘बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर’ स्थापित

ग्वालियर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिक्षानगर में मध्य प्रदेश का पहला ‘बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर’ स्थापित किया गया है। यह देश का 41वां कॉर्नर है, जिसे भारतीय वन्यजीव संस्थान और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने शुरू किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को गंगा और उसकी सहायक नदियों की जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इंटरएक्टिव डिस्प्ले और विशेषज्ञ सत्रों के माध्यम से छात्रों को नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवों और संरक्षण के महत्व की जानकारी दी जा रही है।