भोपाल रेलवे स्टेशन पर गंदगी के मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में 10.06 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि का आकलन पेश किया है। एनजीटी पीठ ने रेलवे को इस राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भोपाल रेलवे स्टेशन पर कचरा प्रबंधन में कई खामियां सामने आई हैं, जिनमें चोक नालियां और खुले कचरा भंडारण स्थल शामिल हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सूचित किया है कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमेडिकल कचरे के ‘डीप बरीअल’ निपटान नियमों का पालन नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 9,178 में से केवल 5,715 स्वास्थ्य केंद्र ही मानकों के अनुरूप पाए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सभी संबंधित केंद्र शामिल हैं। सीपीसीबी ने उल्लंघन करने वाले राज्यों को आठ सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई हो सकती है। एनजीटी ने सीपीसीबी को अगली सुनवाई, जो 28 अक्तूबर 2026 को है, से पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उज्जैन के पवित्र सप्तसागरों में सीवेज प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एनजीटी ने पाया कि सात में से छह प्रमुख कुंडों का पानी स्नान योग्य नहीं बचा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों में फीकल कोलीफार्म और टोटल कोलीफार्म की मात्रा केंद्रीय मानकों से अधिक है, जो सीवेज की मौजूदगी का संकेत देती है। एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उज्जैन नगर निगम आयुक्त को 30 दिनों के भीतर जल गुणवत्ता सुधारने तथा प्रदूषण फैलाने वालों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने उज्जैन के सप्तसागरों की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अधिकरण के अनुसार, गोवर्धन सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर, क्षीर सागर, रुद्र सागर और पुष्कर सागर सहित छह सागरों का पानी स्नान योग्य नहीं है, फिर भी श्रद्धालु इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कर रहे हैं। एनजीटी ने इसे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और आस्था से सीधा खिलवाड़ बताया।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा तालाब, कालियासोत और केरवा डैम में अतिक्रमण के मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय की है। एनजीटी ने वेटलैंड, एफटीएल और प्रतिबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और तहसीलदार पर डाली है। कार्रवाई में देरी पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाब देना होगा। एनजीटी ने सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर तीन सप्ताह के भीतर सभी अवैध निर्माणों की सूची और हटाए गए अतिक्रमण का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के साथ पेश करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को है।
कलियासोत बांध क्षेत्र में वेटलैंड की पर्यावरणीय संवेदनशीलता की अनदेखी कर मड रैली और स्टंट करने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। रातीबड़ पुलिस ने 10 चार पहिया वाहन जब्त किए हैं और संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। 26 जुलाई को हुए इस घटनाक्रम में कुछ लोगों ने पुलिस कार्रवाई की भनक लगने पर वाहनों से कीचड़ साफ कर पहचान छिपाने का प्रयास किया। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने बताया कि यह घटना राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के जनवरी 2020 के आदेश की अवहेलना है, जिसमें वेटलैंड क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी।
भोपाल, जिसे झीलों का शहर कहा जाता है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ तालाबों, पहाड़ियों और हरित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है। इसके विपरीत, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने तालाब संरक्षण के लिए अलग प्राधिकरण स्थापित किए हैं और नियम तोड़ने वालों के लिए 5 साल तक की जेल का प्रावधान किया है। भोपाल में प्राकृतिक संपदा के संरक्षण की जिम्मेदारी विभिन्न एजेंसियों में बंटी हुई है, जिससे समन्वय की कमी और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय न हो पाने की समस्या है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल के बड़ा तालाब में अतिक्रमण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सरकार व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। एनजीटी ने छह वर्षों से मामले के लंबित होने और वेटलैंड क्षेत्र का सीमांकन न होने पर आपत्ति व्यक्त की है, जिससे अवैध निर्माणों को संरक्षण मिलने की आशंका है। न्यायाधिकरण ने इसे गंभीर विषय बताते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। भोपाल नगर निगम ने अतिक्रमणों की मौजूदगी स्वीकार की है। एनजीटी ने नगर निगम और कलेक्टर को एफटीएल व बफर जोन के अतिक्रमणों को हटाने और अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण प्रदेशभर में बारिश तेज हुई है। पिछले 24 घंटे में 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिसमें नर्मदापुरम में सर्वाधिक 4.2 इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। मौसम विभाग ने अगले दो दिन कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बड़े तालाब में अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध अर्पण के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अनुष्ठानों में दूध अर्पित करने पर रोक लगाने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। हालांकि, एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अनुचित माना और भविष्य में ऐसे आयोजनों पर विशेष निगरानी तथा एहतियात बरतने के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की रिपोर्ट में नर्मदा की जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया, लेकिन बड़ी मात्रा में दूध प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए उचित नहीं माना गया।