राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल के बड़ा तालाब में अतिक्रमण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर सरकार व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। एनजीटी ने छह वर्षों से मामले के लंबित होने और वेटलैंड क्षेत्र का सीमांकन न होने पर आपत्ति व्यक्त की है, जिससे अवैध निर्माणों को संरक्षण मिलने की आशंका है। न्यायाधिकरण ने इसे गंभीर विषय बताते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। भोपाल नगर निगम ने अतिक्रमणों की मौजूदगी स्वीकार की है। एनजीटी ने नगर निगम और कलेक्टर को एफटीएल व बफर जोन के अतिक्रमणों को हटाने और अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण प्रदेशभर में बारिश तेज हुई है। पिछले 24 घंटे में 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिसमें नर्मदापुरम में सर्वाधिक 4.2 इंच वर्षा रिकॉर्ड हुई। मौसम विभाग ने अगले दो दिन कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बड़े तालाब में अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध अर्पण के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अनुष्ठानों में दूध अर्पित करने पर रोक लगाने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। हालांकि, एनजीटी ने इसे पर्यावरणीय दृष्टि से अनुचित माना और भविष्य में ऐसे आयोजनों पर विशेष निगरानी तथा एहतियात बरतने के निर्देश दिए। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की रिपोर्ट में नर्मदा की जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया, लेकिन बड़ी मात्रा में दूध प्रवाहित करना पर्यावरण के लिए उचित नहीं माना गया।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने नदियों में दूध अर्पित करने को आस्था का विषय बताया है और इस पर प्रतिबंध से इनकार किया। हालांकि, एनजीटी ने चेतावनी दी कि हजारों लीटर दूध प्रवाहित करने से जल पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है, इसलिए आस्था और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन आवश्यक है। यह आदेश सीहोर जिले में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध बहाने की घटना के बाद आया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में तत्काल गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए, लेकिन विशेषज्ञों ने भविष्य में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ने से जलीय जीवों को खतरे की आशंका जताई।