भोपाल रेलवे स्टेशन पर गंदगी के मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में 10.06 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि का आकलन पेश किया है। एनजीटी पीठ ने रेलवे को इस राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। संयुक्त समिति की रिपोर्ट में भोपाल रेलवे स्टेशन पर कचरा प्रबंधन में कई खामियां सामने आई हैं, जिनमें चोक नालियां और खुले कचरा भंडारण स्थल शामिल हैं।
इंदौर के पीपल्याहाना तालाब का पानी हरा पड़ने लगा है और उसमें काई जम रही है, जिससे गंदगी मिलने की आशंका बढ़ गई है। यह तालाब आसपास के क्षेत्र में भूजल रिचार्जिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इसके दूषित पानी से जमीन में पहुंचने वाले पानी के भी दूषित होने का खतरा है। नगर निगम द्वारा स्टॉर्म वाटर लाइन से पानी छोड़े जाने के बावजूद, पानी का हरा होना गंदगी के प्रवेश का संकेत दे रहा है। ई-कोलाई सहित अन्य बैक्टीरिया भूजल में पहुंचकर उसे दूषित कर सकते हैं, जैसा कि पूर्व में इंदौर के बोरिंग पानी में पाया गया था, जिसका सेवन जानलेवा हो सकता है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी से कर्वी नगर को पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इंटेकवेल से 50 मीटर दूर एक सड़ा हुआ कुत्ता मिलने से नदी में गंदगी और सीवर के पानी के आरोपों ने पेयजल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके विरोध में सत्याग्रही अभिमन्यु सिंह ने साथियों के साथ जल सत्याग्रह और आमरण अनशन शुरू किया। प्रशासन के आश्वासन पर सत्याग्रह समाप्त हो गया। एसडीएम सदर अजय कुमार ने आंदोलनकारियों से वार्ता के बाद समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सूचित किया है कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमेडिकल कचरे के ‘डीप बरीअल’ निपटान नियमों का पालन नहीं हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 9,178 में से केवल 5,715 स्वास्थ्य केंद्र ही मानकों के अनुरूप पाए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सभी संबंधित केंद्र शामिल हैं। सीपीसीबी ने उल्लंघन करने वाले राज्यों को आठ सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई हो सकती है। एनजीटी ने सीपीसीबी को अगली सुनवाई, जो 28 अक्तूबर 2026 को है, से पहले प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने इंदौर में ‘क्यों रूठ जाती है प्रकृति’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि अब पेड़ नहीं, पानी लगाने का समय आ गया है। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने और वर्षा जल संचय की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जोशी ने बताया कि जल संकट अब देशभर की समस्या है और भारत का ट्रॉपिकल देश होना एक लाभ है। उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप के कारण बदलते मौसम, कृषि के नकारात्मक प्रभाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बजाय प्राकृतिक बुद्धिमत्ता पर काम करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने पहाड़ों पर पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की भी बात कही।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उज्जैन के पवित्र सप्तसागरों में सीवेज प्रदूषण पर सख्ती दिखाई है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच एनजीटी ने पाया कि सात में से छह प्रमुख कुंडों का पानी स्नान योग्य नहीं बचा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों में फीकल कोलीफार्म और टोटल कोलीफार्म की मात्रा केंद्रीय मानकों से अधिक है, जो सीवेज की मौजूदगी का संकेत देती है। एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उज्जैन नगर निगम आयुक्त को 30 दिनों के भीतर जल गुणवत्ता सुधारने तथा प्रदूषण फैलाने वालों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने उज्जैन के सप्तसागरों की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अधिकरण के अनुसार, गोवर्धन सागर, विष्णु सागर, पुरुषोत्तम सागर, क्षीर सागर, रुद्र सागर और पुष्कर सागर सहित छह सागरों का पानी स्नान योग्य नहीं है, फिर भी श्रद्धालु इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कर रहे हैं। एनजीटी ने इसे श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और आस्था से सीधा खिलवाड़ बताया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल की रामसर साइट बड़ा तालाब के संरक्षण पर सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणीय उल्लंघनों के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भारत भवन ट्रस्ट को मामले में पक्षकार बनाया और छह सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया। याचिका में भोज वेटलैंड के 50 मीटर बफर जोन में 2002 से ब्लास्टिंग, अवैध खुदाई और पेड़ों की कटाई जैसे नियमों के विपरीत गतिविधियों का आरोप है, जिससे झील के जलग्रहण क्षेत्र और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल सेंट्रल जोन बेंच ने कोलार रोड स्थित अकबरपुर बाघ भ्रमण क्षेत्र में अवैध खुदाई, पहाड़ी कटान और पेड़ों की कटाई के मामले में सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने नवदुनिया में प्रकाशित एक समाचार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए और मध्यप्रदेश शासन, भोपाल कलेक्टर, नगर निगम, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि सरकारी भूमि पर मशीनों से खुदाई कर पहाड़ी को समतल किया जा रहा था, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। एक दो सदस्यीय समिति को छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास भूजल के दूषित होने के आरोपों को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) को विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भूजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने और 13 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश वर्ष 2004 से लंबित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें हस्तक्षेपकर्ताओं ने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर खतरे की शिकायतें उठाई थीं। मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।