बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर-चंबल अंचल को “पीले सोने” अर्थात सरसों की खान कहा जाता है।
देश में सरसों के उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहने वाले इस अंचल के किसानों के लिए सरसों की फसल पैदा करना अब अधिक फायदेमंद होगा। केंद्र सरकार ने सरसों के समर्थन मूल्य में ₹413 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।
अंचल में सबसे अधिक सरसों का उत्पादन मुरैना और भिंड जिलों में होता है, जिसके बाद ग्वालियर का स्थान है।
इस वर्ष ग्वालियर जिले में 60 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की गई है, जबकि मुरैना और भिंड जिलों में दो से लेकर तीन लाख हेक्टेयर तक सरसों बोई गई है।
केंद्र सरकार की घोषणा के बाद अब किसानों को सरसों के ₹6,613 प्रति क्विंटल दाम मिलेंगे। इससे पहले सरसों का सरकारी समर्थन मूल्य ₹6,200 प्रति क्विंटल था।
केंद्र सरकार ने अन्य फसलों के लिए भी समर्थन मूल्य घोषित किए हैं।
वर्ष 2026-27 के लिए सरसों का समर्थन मूल्य ₹6,200 प्रति क्विंटल था, लेकिन अंचल की मंडियों में सरसों ₹6,800 से ₹7,000 प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी, जिससे किसानों को एमएसपी से अधिक दाम प्राप्त हुए।
हालांकि, सरकार ने वर्ष 2027-28 के लिए समर्थन मूल्य को बढ़ाकर ₹6,600 कर दिया है, लेकिन सरसों से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सरसों के बाजार भाव एमएसपी से अधिक ही रहेंगे।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह के अनुसार, अभी तक सरसों की बुवाई के लिए मौसम अनुकूल है। हालांकि, यदि आगामी दिनों में तापमान में वृद्धि होती है, तो बुवाई प्रभावित हो सकती है।
डॉ. कुशवाह ने यह भी बताया कि सरसों के भाव उत्पादन पर निर्भर करेंगे। यदि इस वर्ष अच्छा उत्पादन होता है, तो बाजार भाव में कुछ कमी आ सकती है। इसके विपरीत, यदि मौसम या प्राकृतिक कारणों से उत्पादन प्रभावित होता है, तो भाव अधिक बने रहेंगे।

