मंदसौर जिले में खरीफ सीजन 2025 के फसल बीमा मुआवजे को लेकर किसानों में गहरा असंतोष है। अविवृष्टि और बीमारी से फसलों को नुकसान होने के बावजूद किसानों को उचित बीमा राशि नहीं मिली है, जिससे मल्हारगढ़ और भानपुरा सहित कई क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए। किसानों ने मुआवजे में विसंगति का आरोप लगाया, जहां कुछ को हजारों रुपए मिले तो कुछ को नाममात्र की राशि। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1.38 लाख से अधिक किसानों को 22.66 करोड़ रुपये का क्लेम मिला, लेकिन किसानों का दावा है कि सोयाबीन में शत-प्रतिशत नुकसान हुआ था।
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन ने पन्ना जिले के लक्ष्मीपुर ओपन कैप परिसर में धान के रखरखाव में अनियमितताओं पर कार्रवाई की है। कॉर्पोरेशन अध्यक्ष संजय नगायच के निरीक्षण के बाद पन्ना शाखा प्रबंधक व गुणवत्ता नियंत्रक वंदना बागरी को निलंबित किया गया। निरीक्षण में 2025-26 के करीब 17,543 मीट्रिक टन धान के स्टैकों पर फटे कैप-कवर, कैप-नेट का उपयोग न होना, अपर्याप्त दूरी और साफ-सफाई का अभाव पाया गया। आदेश में बागरी को नियमों के अनुरूप शाखा संचालन और धान के उचित रखरखाव में विफल रहने का जिम्मेदार ठहराया गया है।
ग्वालियर जिले में खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 17 अगस्त कर दी गई है ताकि अधिक किसान लाभ उठा सकें। अब तक 42,700 किसानों ने बीमा कराया है, जो पिछले वर्ष के समान है। हालांकि, अंचल में किसानों की अपेक्षित रुचि नहीं दिख रही है, खासकर अऋणी किसानों में, जिनमें से केवल 90 ने ही बीमा कराया है। बीमा न कराने के पीछे प्रशासनिक विसंगतियां, पटवारी हल्का इकाई प्रणाली, 72 घंटे की जटिल शर्त और फसल कटाई व क्लेम भुगतान में देरी जैसे कारण बताए गए हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार की ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन कोटा बढ़ाने की मांग पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में बताया कि मध्य प्रदेश को मूल्य समर्थन योजना में 4,54,580 टन मूंग खरीद की स्वीकृति दी गई है, जो विभिन्न राज्यों को स्वीकृत कुल मात्रा का सर्वाधिक 87 प्रतिशत है। यह देश में किसी भी राज्य को मिली सबसे अधिक स्वीकृति है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार खरीद का लक्ष्य नहीं देती और प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत 25 प्रतिशत की सीमा में ही स्वीकृति दी जाती है।
सीहोर में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर बालागुरु के. ने जांच रिपोर्ट के आधार पर जिले के तीन वेयरहाउसों को ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा की है। यह अनुशंसा मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (एमपीडब्ल्यूएलसी) के प्रबंध संचालक को पत्र भेजकर की गई। इसके अतिरिक्त, एमपीडब्ल्यूएलसी की श्यामपुर शाखा प्रबंधक की एक वेतन वृद्धि रोकने की भी सिफारिश की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नर्मदापुरम जिले के माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में सरकारी मूंग के भंडारण में गंभीर अनियमितता सामने आई है। लगभग 62,862 बोरियों की जांच में कई में निर्धारित मानकों से अधिक कचरा और मिट्टी मिली, जबकि कुछ बोरियां पूरी तरह मिट्टी से भरी पाई गईं। शिकायत के बाद कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच दल ने बुधवार को वेयरहाउस को तत्काल सील कर दिया। सभी 23 स्टेकों से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। कलेक्टर ने गुणवत्ता से समझौता न करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही।