मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती विवाद का कारण बन गई है। सरकार कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण इसे हतोत्साहित कर रही है, जबकि किसान कम समय में अधिक लाभ के कारण इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। गोदामों में पिछले सालों की साढ़े तीन लाख टन से अधिक मूंग कमजोर गुणवत्ता के कारण पड़ी हुई है। किसान उपार्जन में प्रति हेक्टेयर निर्धारित डेढ़ क्विंटल की मात्रा से असंतुष्ट हैं, जबकि उनका दावा 14-16 क्विंटल का है। इस असंतुष्टि के कारण 3.47 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 82 हजार ने ही उपज बेची। किसान नेता राकेश टिकैत राजगढ़ आएंगे।
भोपाल में दो दिनों से चल रहा किसानों का धरना आंदोलन बुधवार देर रात समाप्त हो गया। यह आंदोलन समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने और खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था बदलने की मांग को लेकर था। मंत्रालय में मंत्री समूह के साथ हुई बैठक में हर पात्र किसान से 60 प्रतिशत उपज खरीदने और ई-टोकन व्यवस्था को स्थगित करने पर सहमति बनी। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने निर्णयों की जानकारी दी, जिसमें मूंग खरीदी की सीमा 25 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करना, खरीदी की अंतिम तिथियों में वृद्धि और ई-टोकन व्यवस्था की समीक्षा के लिए समिति गठन शामिल है।