मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के आंदोलन और राजनीतिक दबाव के चलते ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद सीमा को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। हजारों किसानों ने इस मांग को लेकर मंगलवार और बुधवार को राजधानी भोपाल में धरना दिया था, जो बुधवार रात समाप्त हुआ। सरकार का उद्देश्य किसानों की एमएसपी निर्भरता कम करना था, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसे मुद्दा बनाया। सरकार के लिए ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद घाटे का सौदा है, और गुणवत्ता संबंधी सवाल भी उठते रहे हैं। अब उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसान आंदोलन को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि नर्मदापुरम से शुरू हुई किसान क्रांति पदयात्रा भोपाल पहुंच गई है, जिसमें पांच हजार से अधिक किसान शामिल हैं। पटवारी ने मूंग की 100% खरीद, एमएसपी की कानूनी गारंटी और खाद की उपलब्धता सहित किसानों की प्रमुख मांगें गिनाईं और सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से किसानों की आवाज सुनने की अपील की। मंगलवार को भोपाल में प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ, बैरिकेड्स टूटे और 150 कॉलोनियां ब्लॉक हुईं, जिससे पुलिस व्यवस्था विफल रही।
मध्यप्रदेश में संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन मंगलवार को तेज हो गया है। किसान मूंग की शत-प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर नर्मदापुरम से भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रशासन की रोक-टोक और बैरिकेडिंग के बावजूद किसान आगे बढ़ते रहे। इस पदयात्रा के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल और जबलपुर की ओर से सुल्तानपुर मार्ग प्रभावित हुआ है। किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखने का ऐलान किया है, और कहा है कि ठोस फैसले के बिना आंदोलन समाप्त नहीं होगा। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की चुनौती है।
मध्य प्रदेश में मूंग खरीद सीमा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद सामने आया है। केंद्र सरकार ने ग्रीष्मकालीन सीजन 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन से अधिक मूंग खरीद की मंजूरी दी है, जो राष्ट्रीय कोटे का लगभग 87% है और अब तक की सबसे बड़ी मंजूरी है। हालांकि, 16 जुलाई 2026 तक राज्य में केवल 7,947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हुई है, जो स्वीकृत मात्रा का लगभग 2% है। केंद्र ने राज्य से पहले मौजूदा स्वीकृत मात्रा को तेजी से पूरा करने का आग्रह किया है, ताकि किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सके, और उसके बाद ही अतिरिक्त खरीद प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।