बुलंद सोच, इंदौर।

खाद्य तेलों की मनमानी मात्रा वाली पैकिंग बनाकर बेचने पर लगी पाबंदी का असर बाजार में नहीं दिख रहा है। 1 सितंबर से देशभर के बाजारों में नौ तरह के मानक आकार के पैकेट ही बिकने अनिवार्य हैं। सितंबर का पूरा पखवाड़ा बीतने के बाद भी बाजार में मनमाने आकार के पैक बेचे जा रहे हैं। छोटी दुकानों से लेकर बड़े मॉल्स तक खाद्य तेल के ऐसे पैकेट पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। आदेश लागू करने से पहले सरकार ने तीन महीने का समय दिया था। मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि त्योहारी सीजन में भी पैकिंग की आड़ में उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का सिलसिला जारी रह सकता है।
पूर्व की स्थिति और उद्योग की चिंता
बीते वर्षों में खाद्य तेलों की पैकिंग से सरकार ने मानक माप की पाबंदी हटा दी थी। इसका असर यह हुआ कि बाजार में हर ब्रांड और कंपनी अपने हिसाब से अलग-अलग मात्रा में लगभग एक जैसे आकार के दिखने वाले खाद्य तेलों के पैकेट बेचने लगी थीं। कोई कंपनी 870, कोई 850, कोई 900 मिलीलीटर और इसी तरह की अलग-अलग पैकिंग निकाल रही थी। दूसरी ओर एक लीटर और एक किलो जैसे पैक भी बाजार में बिक रहे थे। समान रूप से बेचे जा रहे ऐसे पैकेट में सामान्य उपभोक्ता किसी तरह का अंतर नहीं कर पाता था। वह सिर्फ दाम देखकर किफायती समझकर किसी पैक को चुन लेता था, लेकिन मात्रा के मामले में उसे वही पैक महंगा पड़ जाता था। बाजार में शुरू हुई इस तरह की प्रतिस्पर्धा पर खुद तेल उद्योग ने भी चिंता जताई थी।
मानक पैकिंग का निर्धारण
कई बैठकों के बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने जून में आदेश जारी कर दिया कि अब नौ निश्चित आकार के पैक में ही तेल बिक सकेंगे। तय मानक आकार में अब खाद्य तेल केवल 200 मिली/ग्राम, 500 मिली/ग्राम, 1 लीटर/किलो, 2 लीटर/किलो, 3 लीटर/किलो, 4 लीटर/किलो, 5 लीटर/किलो, 15 लीटर/किलो और 20 लीटर/किलो की तय पैकिंग में ही बेचे जा सकेंगे। मानक अधिनियम 200 ग्राम-मिली से छोटी पैकिंग पर लागू नहीं होगा।
बाजार में मौजूदा स्थिति और कारण
इंदौर के बाजार और मॉल में जब नईदुनिया प्रतिनिधि पहुंचा तो एक लीटर वाले पैक के साथ रैक में 800 ग्राम, 840 ग्राम और 870 ग्राम जैसे तेल के पैकेट बिकते नजर आए। कारोबारी कारण बता रहे हैं कि ऐसी पैकिंग में लगातार अगस्त तक स्टॉक पैक किया गया। ऐसे में अभी गोदामों में काफी मात्रा में अमानक पैकिंग का माल उपलब्ध है। आशंका है कि त्योहारों के दौरान भले ही मॉल से ऐसे पैकेट हट जाएं, लेकिन सामान्य दुकानों से अमानक पैकेट में तेल बिकते रहेंगे।
उद्योग और विभाग के बयान
द सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. बी.वी. मेहता ने बताया कि सरकार से उनकी कई बैठकें हुईं। उद्योग प्रतिनिधियों ने ही मांग की थी कि पैकिंग का स्टैंडर्ड साइज होना चाहिए, क्योंकि उपभोक्ता विभिन्न मात्राओं को देखकर भ्रमित हो जाते थे और सिर्फ दाम देखकर खरीदारी करते थे। डॉ. मेहता का मानना है कि जो माल पहले पैक हो चुका है, बाजार में अभी वही दिख रहा है और पूरी तरह स्टॉक हटने में थोड़ा समय लगेगा। नापतौल विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर संजय पाटनकर ने कहा कि तेल मिलों के पास पैकिंग का खासा स्टॉक होता है, ऐसे में सरकार ने पुरानी पैकिंग सितंबर तक खत्म करने का समय दिया था। उन्होंने बताया कि आगे वे जांच भी शुरू करेंगे और यदि कहीं अमानक पैकेट बन रहे हैं और बेचे जा रहे हैं तो फिर कार्रवाई की जाएगी।

