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2026-10-17

डॉ. पी. शशिकला की नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती; 7 प्रतिवादियों को नोटिस

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की वर्तमान रजिस्ट्रार व प्रोफेसर डॉ. पी. शशिकला की वर्ष 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। डिवीजन बेंच ने रिट अपील क्रमांक 1269/2026 को स्वीकार करते हुए डॉ. पी. शशिकला सहित सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका डॉ. आशुतोष मिश्रा द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिडियाल और अधिवक्ता संपत कुमार कुशवाहा के माध्यम से दायर की गई है।

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शैक्षणिक योग्यता पर सवाल

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि मार्च 2012 में न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें डॉ. शशिकला नियुक्ति के समय पूरी नहीं करती थीं। अदालत के समक्ष दी गई दलीलों के अनुसार, इस पद के लिए कंप्यूटर एप्लीकेशन अथवा मॉस कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री के साथ पीएचडी, आठ वर्ष का शिक्षण अनुभव और न्यूनतम एपीआई अंक की शर्त रखी गई थी, जिसमें एमएससी और एमसीए की पात्रता का मुद्दा शामिल था। डॉ. शशिकला के पास 1996 की कंप्यूटर साइंस में एमएससी और 2010 में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से इसी विषय में डॉक्टरेट की डिग्री है, लेकिन एमसीए की डिग्री नहीं है। इसी आधार पर उनकी नियुक्ति की पात्रता पर सवाल उठाया गया है। इस पद के लिए इंटरव्यू सितंबर 2013 में हुआ था और नियुक्ति जुलाई 2014 में हुई थी। हालांकि, इन दलीलों पर अदालत का अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।

पदोन्नति पर भी आपत्ति

याचिका में डॉ. शशिकला की नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर हुई पदोन्नति पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि करियर एडवांसमेंट योजना के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक था। हालांकि, जुलाई 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति से लेकर नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति तक की अवधि तीन वर्ष से कम थी।

अन्य प्रतिवादी और वर्तमान स्थिति

इस मामले में मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग, जनसंपर्क विभाग, विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बीके कुठियाला और डॉ. सीपी अग्रवाल सहित अन्य को भी प्रतिवादी बनाया गया है। डॉ. अग्रवाल नियुक्ति के समय कंप्यूटर विभाग के अध्यक्ष थे। विश्वविद्यालय की कुछ अन्य नियुक्तियों को भी अलग-अलग मामलों में हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने का उल्लेख सामने आया है। फिलहाल इस मामले में अदालत ने नोटिस जारी किया है और नियुक्ति की वैधता से जुड़े सभी पहलुओं पर अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।