BREAKING NEWS
2026-10-17

मध्य प्रदेश में अगले 5 साल में 7,000 स्कूल बंद या मर्ज होने का अनुमान

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में सर्वसुविधायुक्त स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए शासकीय सांदीपनि विद्यालयों का तेजी से विकास हो रहा है। इसके साथ ही कम छात्र संख्या वाले छोटे सरकारी स्कूलों के भविष्य पर संकट गहरा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय ऑनलाइन डिजिटल डाटाबेस यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) प्लस के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के 2,426 सरकारी स्कूल बंद हुए, जो देश में सर्वाधिक हैं।
अब अगले पांच साल में लगभग सात हजार स्कूल बंद होने या मर्ज होने का अनुमान है। इन स्कूलों के बच्चों को आसपास के सांदीपनि विद्यालयों में भेजा जा सकता है।

Advertisement

सांदीपनि विद्यालय योजना

सांदीपनि योजना के तहत दो चरणों में कुल 773 विद्यालयों पर ₹24,915 करोड़ खर्च करने की योजना है।
योजना के पहले चरण में 370 स्कूल शामिल हैं, जिनमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आते हैं। इन पर ₹13,525 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा रहा है और इनमें लगभग 4.43 लाख विद्यार्थियों को प्रवेश देने का लक्ष्य है।
योजना के दूसरे चरण में 405 स्कूल प्रस्तावित हैं, जिन पर ₹11,390 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। इनमें लगभग 4.05 लाख अतिरिक्त विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना है।
दोनों चरणों में कुल 773 सांदीपनि विद्यालयों, लगभग ₹24,915 करोड़ रुपये के बजट और 8.48 लाख विद्यार्थियों की क्षमता तैयार करने की योजना है।

कम छात्र संख्या वाले स्कूल

प्रदेश में 15,170 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां 20 से कम विद्यार्थी हैं। इन स्कूलों में फिलहाल अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है।
सांदीपनि विद्यालयों के पूरी तरह शुरू होने के बाद इनके आसपास के कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को मर्ज किए जाने की संभावना है। योजना के तहत एक से पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे स्कूलों के विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालयों में भेजा जा रहा है।

संख्यात्मक और गुणात्मक शिक्षा की बहस

स्कूल शिक्षा के पूर्व संयुक्त संचालक राव कुलदीप सिंह का कहना है कि संख्यात्मक और गुणात्मक शिक्षा की बहस हमेशा रही है। विद्यार्थियों की सुगम पहुंच के लिए अधिक संख्या में स्कूल खोलना भी आवश्यक है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण सभी में समान स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना कठिन होता है।
ऐसी स्थिति में यह निर्णय हमेशा दुविधाकारी रहता है कि संख्या को माना जाए या गुणवत्ता को। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवस्था पारदर्शी, गुणात्मक हो और उसमें स्थानीय समुदाय की सहभागिता होनी चाहिए।

सरकारी स्कूलों की घटती संख्या

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की संख्या इस प्रकार कम होती गई है: 2019-20 में 99,411, 2020-21 में 99,152 और 2021-22 में 92,695।
इसके बाद 2022-23 में यह संख्या 92,441, 2023-24 में 92,439, 2024-25 में 92,250 और 2025-26 में 89,824 रही।

बजट और छात्र संख्या की चुनौती

मध्य प्रदेश सरकार का स्कूल शिक्षा पर खर्च लगातार बढ़ा है। दो साल में स्कूल शिक्षा का बजट लगभग नौ हजार करोड़ रुपये बढ़कर ₹36,730 करोड़ रुपये हो गया है। इसके बावजूद, सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाना एक चुनौती बना हुआ है।
मध्य प्रदेश में गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें सांदीपनि विद्यालय की स्थापना सबसे बड़ा कदम है। सर्वसुविधायुक्त इस विद्यालय मॉडल की सराहना मिल रही है।
लोक शिक्षण, मध्य प्रदेश के आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार, इस विद्यालय में आसपास के स्कूलों के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है और बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए बस की सुविधा भी दी जा रही है। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रही है, उन्हें पास के स्कूलों में मर्ज किया गया है। इसका लाभ यह हुआ कि जिन स्कूलों में विद्यार्थी कम होने के बाद भी शिक्षक अधिक थे, उन्हें दूसरे स्कूलों में भेजा गया।