बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर की एक शताब्दी पुरानी नैरो गेज अब हेरिटेज ट्रेन के रूप में भी पटरियों पर लौटती नजर नहीं आएगी। यह ट्रेन कोरोनाकाल में छह साल पहले बंद हो गई थी। दो फीट चौड़ी पटरी वाली इस ट्रेन को हेरिटेज के रूप में सहेजने की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई है। रेलवे ने हेरिटेज ट्रेन का प्रस्ताव खारिज कर दिया है।
ट्रैक हटाने की तैयारी
ग्वालियर से बानमोर तक करीब 20 किलोमीटर नैरो गेज ट्रैक को पूरी तरह उखाड़ने की तैयारी चल रही है। इसके लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे। नैरो गेज सिंधिया रियासतकाल में शुरू हुई थी और ग्वालियर के परिवहन इतिहास का एक अहम हिस्सा रही है। ट्रेन बंद होने के बाद उम्मीद थी कि इसका कुछ हिस्सा हेरिटेज ट्रेन के रूप में सुरक्षित रह जाएगा।
हेरिटेज ट्रेन योजना का मूल्यांकन
लंबे समय से इसे हेरिटेज के रूप में देखने की संभावना जताई जा रही थी। घोसीपुरा से बानमोर गांव के बीच दो कोच की हेरिटेज ट्रेन चलाने की योजना भी बनी थी। पिछले साल रेलवे बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (हेरिटेज) आशिमा मेहरोत्रा और डिप्टी डायरेक्टर राजेश कुमार ने मौके पर इसका सर्वे किया था। तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की पड़ताल के बाद रेलवे ने इसे हेरिटेज ट्रेन के रूप में चलाने से इनकार कर दिया।
जमीन का पुनर्विकास
ट्रैक हटने के बाद जमीन के पुनर्विकास की जिम्मेदारी रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरएलडीए) को सौंपी गई है। आरएलडीए की टीम ग्वालियर से बानमोर तक जमीन का सर्वे कर रही है। कुछ हिस्सों को ग्रीन बेल्ट बनाने के लिए वन विभाग से चर्चा चल रही है। इन स्थानों पर पौधारोपण किया जाएगा। ट्रैक पूरी तरह हटने के बाद जमीन का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा।

