बुलंद सोच, भोपाल।

बच्चों में दिल में छेद सहित कई जन्मजात हृदय संबंधी बीमारियां पाई जाती हैं। अक्सर जन्म के एक-दो वर्ष बाद जब बच्चों की सांस फूलने लगती है या उनका शरीर नीला पड़ने लगता है, तब जांच में हृदय संबंधी गंभीर बीमारी का पता चलता है। अब इन बीमारियों का तुरंत पता लगाने के लिए प्रदेश की सभी नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू) में ईको मशीनें स्थापित की जा रही हैं।
प्रारंभिक चरण में छह ईको मशीनें खरीदी गई हैं। इन्हें छह जिला अस्पतालों के एसएनसीयू में स्थापित किया जाएगा। इनमें खरगौन, बड़वानी और विदिशा में मशीनें लगाने का निर्णय लिया जा चुका है। शेष तीन एसएनसीयू को लेकर भी शीघ्र ही निर्णय होने की संभावना है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से अन्य एसएनसीयू में भी ईको मशीनें स्थापित की जाएंगी। वर्तमान में यदि एसएनसीयू में भर्ती किसी शिशु में हृदय संबंधी लक्षणों का पता चलता है, तो उसे जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता है। हालांकि, यदि शिशु की हालत अच्छी नहीं है, तो उसे एसएनसीयू से जांच के लिए बाहर ले जाना उचित नहीं माना जाता है।
शासकीय मेडिकल कॉलेजों के हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा एसएनसीयू के शिशु रोग विशेषज्ञों को ईकोकार्डियोग्राफी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। दिल में छेद और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का उपचार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क कराया जाता है। इन बीमारियों का उपचार दो से तीन वर्ष की आयु में कराया जाना बेहतर माना जाता है।

