BREAKING NEWS

Latest News

वर्ष 2026 में प्रदेश में खसरे का संक्रमण बढ़ा, बालाघाट में 26 बच्चों की जान गई; भिंड में सर्वाधिक 125 मामले

बालाघाट में खसरा, मलेरिया और कुपोषण के संयुक्त प्रकोप से 26 बच्चों की मौत हो गई है। प्रदेश में खसरे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं; पिछले वर्ष 1,800 के मुकाबले इस वर्ष शुरुआती आठ महीनों में 1,450 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। भिंड में सर्वाधिक 125 मामले हैं, जबकि शिवपुरी और ग्वालियर में भी लगभग 90-90 रोगी मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे का संक्रमण हर चौथे वर्ष बढ़ता है और एक रोगी से 20 अन्य लोगों तक फैल सकता है। तत्काल पहचान, उपचार और टीकाकरण इसकी रोकथाम के प्रभावी उपाय हैं।

मध्य प्रदेश के सभी एसएनसीयू में लगेंगी ईको मशीनें, बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान होगी आसान

मध्य प्रदेश में बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों, जैसे दिल में छेद, की शीघ्र पहचान के लिए सभी नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू) में ईको मशीनें लगाई जा रही हैं। वर्तमान में निदान में देरी होती है, जिससे बच्चों को गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेजों में जांच के लिए भेजना पड़ता है। प्रारंभिक चरण में छह मशीनें खरीदी गई हैं, जिन्हें खरगौन, बड़वानी और विदिशा सहित छह जिला अस्पतालों के एसएनसीयू में स्थापित किया जाएगा। शिशु रोग विशेषज्ञों को ईकोकार्डियोग्राफी का प्रशिक्षण दिया जाएगा, और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निःशुल्क उपचार उपलब्ध होगा।

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने बच्चों की मौत के बाद व्यंगात्मक इस्तीफा दिया

बालाघाट में बच्चों की बीमारी से हुई मौतों के बाद काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीड़ितों से मुलाकात की और इंटरनेट मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक इस्तीफा पोस्ट किया। उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए सेवा में विफलता स्वीकार की। उनके दौरे पर कथित इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा सवाल उठाने से विवाद खड़ा हो गया। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने इसे निंदनीय बताया और इन्फ्लुएंसर्स को प्रायोजित कहा।

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन: देश के 59.28% सिकल सेल मरीज ओडिशा और मध्य प्रदेश में चिह्नित

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत मध्य प्रदेश ने जांच में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां 1.33 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हुई। देशभर में चिह्नित सिकल सेल मरीजों का 59.28% हिस्सा ओडिशा और मध्य प्रदेश में है। मध्य प्रदेश में 40,741 पीड़ित और 2.45 लाख वाहक पाए गए हैं। 17 जनजातीय राज्यों में 7.27 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हुई, जिसमें 2.49 लाख पीड़ित और 20.47 लाख वाहक चिह्नित हुए। सरकार मुफ्त जांच और इलाज प्रदान कर रही है, साथ ही हाइड्रोक्सीयूरिया जैसी दवाएं भी उपलब्ध करा रही है।

मध्य प्रदेश में 56% विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त, 24 चिकित्सक संचालनालय में पदस्थ

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 4,573 स्वीकृत पदों में से 2,581 पद (56.44%) खाली हैं। वहीं, 24 विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य संचालनालय में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं, जिनमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ 25 वर्षों से पदस्थ हैं। इस कमी के कारण जिला अस्पतालों में इलाज और ऑपरेशन जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, और मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करना पड़ रहा है। सरकार भर्ती प्रक्रिया चला रही है, लेकिन रिक्त पदों की तुलना में रफ्तार धीमी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या और गंभीर है।

मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के 3,600 इंटर्न डॉक्टर हड़ताल पर

मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल पर हैं। यह आंदोलन 9 जुलाई 2026 से जारी है और हाल ही में तेज हुआ है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने 20% वृद्धि का मौखिक आश्वासन दिया है, लेकिन डॉक्टर लिखित आदेश पर अड़े हैं। हड़ताल से नियमित ओपीडी और वार्ड सेवाएं प्रभावित हुई हैं, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी इंटर्न्स का समर्थन किया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट गहराने की आशंका है।

मध्य प्रदेश: एमबीबीएस ट्यूशन फीस में देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य, इंटर्नशिप स्टाइपेंड में पिछड़ा

मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सामने आए आंकड़ों के अनुसार, शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की ट्यूशन फीस के मामले में मध्य प्रदेश देश का पांचवां सबसे महंगा राज्य है, जहां छात्रों से सालाना 1 लाख रुपये फीस ली जाती है। इसके विपरीत, इंटर्नशिप के दौरान उन्हें मात्र 14,337 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। कई राज्यों में कम फीस होने के बावजूद इंटर्न्स को मध्य प्रदेश से अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। करीब 3,600 इंटर्न डॉक्टर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त होगी कान की गंभीर बीमारियों की जांच

मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कानों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच की सुविधा मिलेगी। इसके लिए अत्याधुनिक ऑडियोलॉजी उपकरण खरीदे जा रहे हैं। इन मशीनों से छोटे बच्चों और नवजातों में बहरेपन का शुरुआती पता चल सकेगा, जिससे सही समय पर इलाज संभव होगा। साथ ही, कान में दर्द, सीटी बजने या चक्कर आने जैसी समस्याओं के कारण का पता लगाने में भी मदद मिलेगी।

मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों का अकाल: ग्वालियर जीआरएमसी में 24% फैकल्टी पद रिक्त

मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में 353 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से 83 रिक्त हैं, जो कुल 24% है और इसे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रखता है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज 26% रिक्त पदों के साथ पहले स्थान पर है। एमबीबीएस सीटें बढ़ने के बावजूद डॉक्टरों की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और मरीजों का उपचार प्रभावित हो रहा है। प्रशासन लगातार रिक्त पदों को भरने का प्रयास कर रहा है।

ग्वालियर जिला अस्पताल में प्लास्टर सामग्री और एंटीबायोटिक दवाओं की कमी

ग्वालियर के मुरार जिला अस्पताल में प्लास्टर सामग्री और कुछ एंटीबायोटिक दवाओं की कमी से मरीज परेशान हैं। हड्डी की चोट वाले मरीजों को प्लास्टर सामग्री नहीं मिल रही, वहीं एंटीबायोटिक दवाओं के अभाव में उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों का कहना है कि मुफ्त इलाज के लिए सरकारी अस्पताल आते हैं, लेकिन अब उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने दवाओं की मांग भेजने का दावा किया है, जबकि सिविल सर्जन ने प्लास्टर सामग्री उपलब्ध होने की बात कही है।