बुलंद सोच, ग्वालियर।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए उस पर ₹30,000 क्षतिपूर्ति और ₹1,500 प्रकरण व्यय का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह आदेश 11 सितंबर 2026 को आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मोहम्मद तसलीम खान की शिकायत पर दिया।
सामान की बुकिंग और असामान्य यात्रा
परिवादी मोहम्मद तसलीम खान ने 2 जुलाई 2025 को खंडवा से ग्वालियर के लिए डबल बेड और अलमारी सहित सात पार्सल बुक किए थे। रेलवे ने इसके लिए ₹2,959 शुल्क लिया था। यह सामान 13 दिन बाद 15 जुलाई 2025 को ग्वालियर पहुंचा और बार-बार चढ़ाने-उतारने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।
मार्ग भटकाव और अतिरिक्त दूरी
आयोग ने रेलवे के दस्तावेजों और परिवादी को मिले संदेशों के आधार पर पाया कि सामान को 4 जुलाई को ग्वालियर उतारने के बजाय श्रीगंगानगर भेज दिया गया था। वहां से इसे 5 जुलाई को अंबाला कैंट, फिर 12 जुलाई को अंबाला से इंदौर और 14 जुलाई को इंदौर से ग्वालियर के लिए भेजा गया। इस प्रकार, 670 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला यह सामान 13 दिन में ग्वालियर पहुंचा।
रेलवे का तर्क और आयोग का निर्णय
रेलवे ने सामान की पैकिंग ठीक नहीं होने और तकनीकी खराबी का तर्क देकर जिम्मेदारी से इनकार किया था। आयोग ने कहा कि जब रेलवे ने सामान को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए शुल्क लिया था, तो उसका दायित्व था कि वह सामान को सुरक्षित और उचित समय में ग्वालियर पहुंचाए। आयोग ने यह भी कहा कि सामान को बार-बार उतारने-चढ़ाने से क्षति होना स्वाभाविक है।
क्षतिपूर्ति का विवरण
आयोग ने रेलवे को 45 दिन के भीतर ₹20,000 सामान की क्षति के लिए और ₹10,000 देरी व मानसिक परेशानी के लिए देने के निर्देश दिए हैं। यदि समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो रेलवे को परिवाद प्रस्तुति की तारीख से वसूली तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

