जबलपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित गुप्ता ने नईदुनिया विमर्श कार्यक्रम में ‘नकली’ खाद्य पदार्थ की सही परिभाषा समझाई। उन्होंने बताया कि हर खराब उत्पाद नकली नहीं होता, बल्कि वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों से बाहर होता है। ऐसे उत्पादों को सब-स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड और अनसेफ जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। गुप्ता ने दूध उत्पादों, विशेषकर पनीर और खोवा में मिलावट की संभावनाओं, विभिन्न प्रकार की वसा के उपयोग और उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक सावधानियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपभोक्ताओं को लेबल जांचने और शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया।
ग्वालियर जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री और बिना पंजीयन खाद्य कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। अपर जिला मजिस्ट्रेट अनिल बनवारिया ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत नौ प्रकरणों में सुनवाई के बाद संबंधित फर्मों पर कुल नौ लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जांच में दही, मावा, मिठाई, पनीर और घी सहित कई खाद्य सामग्री के नमूने अमानक पाए गए। ओम श्री शुभ लाभ एग्रीटेक प्रालि और बैंबू रेस्टोरेंट सहित कई अन्य फर्मों पर यह कार्रवाई की गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने एनालॉग पनीर की बिक्री पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक बताया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को पत्र लिखकर विस्तृत विवरण मांगा है। साथ ही, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी कर पूछा है कि एनालॉग पनीर बेचने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने जांच के मौजूदा तरीकों पर सवाल उठाते हुए इस मिलावटी उत्पाद पर तत्काल कानूनी प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
भोपाल के कटारा क्षेत्र में डेयरी चलाने वाले प्रज्ञानंद गायकवाड़ ने बिजली कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 29 नवंबर 2025 को स्वीकृत लोड बढ़वाने के लिए ₹15,043 जमा करने के बावजूद कंपनी ने उनका लोड नहीं बढ़ाया है। इसके विपरीत, कंपनी की टीम अधिक लोड उपयोग करने के नाम पर लगातार चालान कर रही है। उपभोक्ता ने विभाग की तकनीकी खामी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच, तत्काल लोड बढ़ाने और अनुचित चालानी कार्रवाई से राहत की मांग की है।
जबलपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक बीमा कंपनी को परिवादी मंगिलाल चोपड़ा को 26,224 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है। चोपड़ा ने कोरोना उपचार के लिए मेट्रो हॉस्पिटल में इलाज कराया था, जिसका बिल 1.40 लाख रुपये था, जिसमें से बीमा कंपनी ने केवल 66,328 रुपये का भुगतान किया था। आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा की गई कटौती को अनुचित मानते हुए यह राशि देय पाई। कंपनी को दो माह के भीतर भुगतान न करने पर वार्षिक ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति के पांच हजार रुपये और परिवाद व्यय के दो हजार रुपये भी देने होंगे। यह आदेश 12 मई 2026 को पारित हुआ।
उपभोक्ता होटल, रेस्टोरेंट और बाजारों में खाद्य पदार्थों में मिलावट या गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे खाद्य एवं औषधि विभाग या इंदौर की कलेक्टर हेल्पलाइन 0731-181 और नगर निगम के इंदौर-311 ऐप जैसे चैनलों पर शिकायत कर सकते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों के तहत ऐसी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। शिकायत करने पर उपभोक्ता फोरम से मुआवजा भी प्राप्त किया जा सकता है। खाद्य निर्माण संस्थानों, विशेषकर स्कूल कैंटीन और मेस के लिए लाइसेंस, स्वच्छता और जंक फूड पर प्रतिबंध जैसे कड़े नियम लागू हैं, जिनका पालन अनिवार्य है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी मामलों में बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित राशि स्पष्ट होने पर पूरे खाते को फ्रीज करना उचित नहीं, बल्कि जांच एजेंसियां केवल संदिग्ध राशि पर डेबिट फ्रीज लगाएं। पूरे खाते को असाधारण परिस्थितियों में ही फ्रीज किया जा सकता है, जिसके लिए कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। यह फैसला भोपाल निवासी अर्चना शिवहरे की याचिका पर आया, जिनका 2.51 करोड़ रुपये का खाता मात्र 980 रुपये के संदिग्ध लेनदेन के कारण फ्रीज कर दिया गया था। कोर्ट ने शिकायत निवारण और खाता सक्रियण के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है।
जबलपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को एक बीमाधारक का मेडिक्लेम मनमाने ढंग से निरस्त करने पर 1,07,613 रुपये ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी पाया। जबलपुर निवासी रोहित जैन ने न्यूमोनाइटिस के उपचार पर 1.07 लाख रुपये से अधिक खर्च किए थे, जिसका दावा कंपनी ने 20 मार्च, 2021 को अस्पष्ट आधार पर खारिज कर दिया था। आयोग ने कंपनी को मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के लिए 2,000 रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया है। भुगतान 45 दिन के भीतर करना होगा।