बुलंद सोच, देवास।

देवास शहर के औद्योगिक क्षेत्र से शिप्रा नदी तक जाने वाले नागधम्मन नाले से औद्योगिक गंदे और रसायन युक्त पानी के बहाव पर प्रशासन ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को देखते हुए शिप्रा में नागधम्मन नाले का गंदा पानी रोकने के उद्देश्य से बुधवार को उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने नागधम्मन का निरीक्षण किया।
इस दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह ने ग्राम हवनखेड़ी पहुंचकर नाले की वर्तमान स्थिति और जल प्रवाह का मुआयना किया।
निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को नागधम्मन नाले के पानी के विभिन्न स्थानों से समय-समय पर नमूने लेने तथा पानी की गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर की नियमित प्रयोगशाला जांच कराने के निर्देश दिए।
संभागायुक्त ने क्षेत्रीय औद्योगिक इकाइयों में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के सुचारू संचालन का विशेष और औचक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी औद्योगिक इकाई द्वारा बिना उपचारित दूषित रासायनिक पानी या अपशिष्ट सीधे नाले में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
संभागायुक्त ने यह भी कहा कि यदि किसी भी उद्योग द्वारा नियमों का उल्लंघन कर दूषित जल बहाया जाना पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने एमपीआइडीसी और संबंधित विभागों को नाले के समीप स्थित उद्योगों की निरंतर निगरानी करने तथा पर्यावरण संरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए।

