इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में एक महिला अपने नाबालिग बेटे के साथ मिलकर दुकानदारों को ऑनलाइन भुगतान का झांसा देकर ठगी कर रही है। महिला अब तक कई दुकानों से हजारों रुपये का सामान खरीदकर बिना भुगतान किए फरार हो चुकी है। पीड़ित दुकानदारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक किए हैं। पुलिस महिला की तलाश में जुटी है, जिसकी पहचान पूर्वा के रूप में हुई है और वह मालवा मील क्षेत्र की निवासी बताई जा रही है।
नोएडा में साइबर जालसाजों ने एक 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 18.50 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को एयरटेल कर्मचारी और महाराष्ट्र पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार मानसिक दबाव में रहीं डॉक्टर ने भयभीत होकर अपनी एफडी तुड़वाकर पूरी रकम दो बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए भेज दी। साइबर विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, सीमित जानकारी और अकेलेपन के कारण बुजुर्ग आसानी से ऐसे ठगों का निशाना बन जाते हैं।
दुबई में कारोबार करने वाले उमर राजपूत ने अपनी पत्नी कौसरी राजपूत के लिए 14.42 लाख रुपये का कीमती सामान महजबीन मोहम्मद इमरान नामक महिला को मुंबई पहुंचाने के लिए सौंपा था। 30 जून को मुंबई हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद महजबीन सामान के साथ गायब हो गई। कौसरी राजपूत और उनके देवर उसे लेने एयरपोर्ट पर मौजूद थे, लेकिन महजबीन उनसे मिले बिना निकल गई। संपर्क न होने पर कौसरी ने सहार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने महजबीन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
जबलपुर में साइबर ठगी के तीन नए मामले सामने आए हैं, जिनमें पीड़ितों से कुल 15 लाख 98 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों को अज्ञात लिंक व संदिग्ध ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है। स्टेट बैंक कॉलोनी निवासी सोनाली सेठिया से 15 लाख रुपये, शक्तिनगर निवासी विनायक से 28 हजार रुपये और एकता विहार कॉलोनी निवासी मधुलिका सिंह चौहान से 70 हजार रुपये की ठगी हुई है। इन मामलों में धमकी भरे संदेश, ऐप डाउनलोड और ‘हाय’ मैसेज का उपयोग किया गया।
ओएलएक्स पर सस्ती सेकेंड हैंड कार खरीदने के लालच में ग्वालियर के अनुराग शर्मा से 1.13 लाख रुपये से अधिक की ठगी की गई। खुद को आगरा कैंट में पदस्थ सेना अधिकारी बताने वाले आरोपी रंजीत सिंह राणा ने स्विफ्ट डिजायर कार की होम डिलीवरी और वाहन ट्रांसफर के नाम पर 17 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में यह राशि ठगी। पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सिरोल थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जबलपुर हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता की लगातार अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को विस्तृत हलफनामा पेश करने और शिकायतकर्ता शाहिद अख्तर की ट्रायल कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। यह मामला भोपाल निवासी जितेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से संबंधित है, जिसमें जमीन धोखाधड़ी का आरोप है। कोर्ट ने समन और वारंटों की तामील न होने पर आंतरिक जांच के भी आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त, 2026 को होगी।
इंदौर में ऑनलाइन सट्टा मामले में नाना पटवारी के करीबी मानव गंगवानी को राजेंद्र नगर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मानव का नाम पहले ड्रग्स कांड में भी सामने आया था। पुलिस ने कथित छात्र नेता रवि चौधरी से भी घंटों पूछताछ की है और उससे खातों की जानकारी मांगी है। डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत के अनुसार, जांच धोखाधड़ी की शिकायत से शुरू हुई थी। सुमित मंत्री के करीबी पप्पू मंत्री से भी पूछताछ की गई, जिसने पुराने प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी। सट्टा मामले में कुणाल पटवारी का नाम भी सामने आया है।
देश में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है, जहाँ 2021 में 50035 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 101928 तक पहुँच गई। ‘आईटी-बेईमानी-धोखा’ जैसी घटनाएँ प्रमुख हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) और ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) जैसी पहलें की हैं। ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है।
इंदौर क्राइम ब्रांच ने शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी गिरोह को फर्जी बैंक खाते और उनकी बैंकिंग किट उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम जमा करने और बांटने में होता था। पुलिस ने 15 मोबाइल फोन, पासबुक, सिम कार्ड और एक स्कार्पियो वाहन जब्त किया है। इस मामले में पहले भी दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच में पता चला है कि इन खातों का उपयोग देश के कई राज्यों में फ्रॉड के लिए किया गया था और करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ₹17.52 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। ठेकेदार दिनकर विश्वमित्र ने आरोप लगाया है कि चौहान ने उन्हें जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर पैसे ठगे। खुद को उद्योगपति नवीन जिंदल का करीबी बताकर और फर्जी वर्क ऑर्डर दिखाकर विश्वास जीता गया। पुलिस कार्रवाई न होने पर विश्वमित्र ने अदालत का रुख किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट ने मोहन नगर पुलिस को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है। राजेश चौहान वर्तमान में व्यवसायी और क्रिकेट एकेडमी के संचालक हैं।