एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन में सरकार की भूमिका तथा आयोग के निर्णयों में बहुमत प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाया। ओवैसी ने एसआईआर को बैकडोर एनआरसी बताया और परिवार रजिस्टर व ऑनलाइन प्रक्रिया की व्यवहार्यता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आयोग से बहुमत से लिए गए फैसलों का ब्योरा मांगा और कहा कि दो सदस्यों के असहमति नोट से निर्णयों की वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने एसआईआर के कारण गरीबों पर पड़े बोझ और अंतिम सूची से बाहर हुए लोगों के भविष्य को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान फर्जी फॉर्म-7 दाखिल कर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर यह “नाटक” बंद नहीं हुआ, तो हैदराबाद में बड़े विरोध प्रदर्शन होंगे। उन्होंने भाजपा और संघ परिवार पर फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया, जिसमें फॉर्म भरने वाले की जानकारी के बिना मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने एसआईआर को “पिछले दरवाजे से लाया गया एनआरसी” भी बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने इसका शुरू से विरोध किया है।