इंदौर आरटीओ में फैंसी नंबरों की ई-नीलामी ने नया रिकॉर्ड बनाया, जहां गुरुवार को बोली 58 मिनट अतिरिक्त चली। ‘MP09 BV’ सीरीज में 108 नंबरों पर बोली लगी, जिसमें ‘0001’ नंबर 1.68 लाख रुपये में बिका। परिवहन विभाग वाहन मालिकों के लिए एक नई सरल व्यवस्था ला रहा है, जिससे वे अपने पुराने वाहन का पसंदीदा नंबर नई गाड़ी पर आसानी से ट्रांसफर करवा सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से वीआईपी नंबरों के शौकीनों को लाभ पहुंचाएगी, क्योंकि वर्तमान स्क्रैप पॉलिसी के तहत यह प्रक्रिया जटिल है।
परिवहन विभाग ने इंदौर से चलने वाली सामान्य बसों की नई किराया सूची जारी की है, जो 5 अगस्त से प्रभावी हो गई है। लगभग 5 साल बाद बढ़ाए गए किराये के तहत, इंदौर से महू का किराया 46 रुपए, देवास का 74 रुपए और उज्जैन का 112 रुपए होगा। आरटीओ ने ऑपरेटरों को तय किराया लेने और यात्रियों को अधिक किराया वसूलने पर शिकायत करने को कहा है। बस ऑपरेटरों ने बढ़ती लागत के कारण किराया वृद्धि को आवश्यक बताया है, हालांकि इससे यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
जबलपुर में सौ करोड़ रुपये से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार आरटीओ विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने ईडी की जांच पूरी होने, चालान पेश होने, आरोप तय होने और आरोपी के 16 माह से न्यायिक हिरासत में होने तथा सुनवाई में लगने वाले समय को आधार बनाया। इससे पूर्व हाईकोर्ट दो बार उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका था। ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए इसे गंभीर आर्थिक अपराध बताया था, लेकिन अदालत ने शर्तों के साथ जमानत मंजूर की।
प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों में एक से पंद्रह अगस्त तक जनता के लंबित कार्यों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उपायुक्त किरण शर्मा के अनुसार, इस अभियान में ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन जैसी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसका निराकरण कार्यालय स्तर पर या शिविर लगाकर होगा। सभी जिलों से आवेदनों का डेटा भी मांगा गया है। हालांकि, परिवहन विभाग की कई सेवाएं ऑनलाइन होने के बावजूद क्वेरी आने पर वाहन मालिकों को कार्यालय बुलाया जाता है।
इंदौर के मुख्य अंतरराज्यीय नायता मुंडला बस स्टैंड से बसों का संचालन लगातार घट रहा है। नोलखा बस स्टैंड बंद होने के बाद यहां स्थानांतरित की गई लगभग 80 बसों में से अब केवल 45 ही नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। बस संचालक शुरुआत से ही नायता मुंडला स्थानांतरण का विरोध कर रहे थे और अब अधिकांश बसें तीन ईमली से चल रही हैं या वहीं यात्रियों को उतार रही हैं। इससे नायता मुंडला बस स्टैंड की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं, यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ रहा है, और तीन ईमली चौराहे पर यातायात जाम की स्थिति बन रही है।