मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सुनवाई पूरी हो गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकारी काम के लिए कर्मचारियों को निजी मोबाइल और इंटरनेट जैसे संसाधनों का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। मैहर जिले के सत्येंद्र सिंह तिवारी की याचिका में शिक्षकों को निजी संसाधन उपयोग करने की मजबूरी और व्यक्तिगत डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट के फैसले से ई-अटेंडेंस की जिम्मेदारी और निजी संसाधनों के उपयोग की सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने शिक्षकों को उफनते नदी-नाले पार न करने और सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पर वेतन काटा जा सकता है और शिक्षकों को समय पर स्कूल में उपस्थित होकर पठन-पाठन में शामिल होना चाहिए। शासकीय शिक्षक संगठन ने ग्रामीण शिक्षकों के लिए आवास, सुरक्षित आवागमन और विशेष ग्रामीण भत्ता जैसी सुविधाओं की मांग की है। आयुक्त ने ऐप में अवकाश विकल्प न होने जैसी तकनीकी दिक्कतों के समाधान के लिए शिक्षक संघ से टीम बनाने को कहा है।
मध्यप्रदेश में भारी बारिश के चलते शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। अब शिक्षक उफनती नदियों को पार कर स्कूल न जाकर प्राचार्य को सूचित करेंगे, जिस पर विभाग ध्यान देगा। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने जान जोखिम में डालकर स्कूल न पहुंचने के निर्देश दिए। सामान्य ई-अटेंडेंस 10:30 बजे तक है, 15 मिनट का ग्रेस पीरियड मिलेगा, पर लगातार लापरवाही पर वेतन कटौती हो सकती है। बैरसिया में आवागमन प्रभावित होने से शिक्षकों की ई-अटेंडेंस में समस्या आई, जिस पर शासकीय शिक्षक संगठन ने राहत और सुविधाओं की मांग की है।
जबलपुर में शिक्षकों के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था में बार-बार लॉगिन समय बदलने से शिक्षक परेशान हैं। पहले 9:30 से 11:30 बजे तक का समय था, जिसे घटाकर 9:30 से 10:30 बजे तक किया गया और अब 10 बजे से पहले लॉगिन के निर्देश हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है और तकनीकी दिक्कतें भी हैं। राज्य शिक्षक संघ जबलपुर के जिलाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी ने इसे शिक्षा सुधार के नाम पर शिक्षकों को मानसिक त्रासदी बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
ग्वालियर सहित प्रदेशभर के 6500 से अधिक शिक्षकों का वेतन ई-अटेंडेंस दर्ज न होने के कारण रुका हुआ है। महीने के चार दिन बाद भी वेतन खातों में नहीं पहुंचा है और अगले कुछ दिन और देरी की उम्मीद है। लोक शिक्षण विभाग की कार्रवाई के डर और जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश के बाद, ब्लॉक स्तर पर गठित समितियां शिक्षकों के आवेदनों की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही वेतन पत्रक बनेगा और भुगतान किया जाएगा।