ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनाव चिह्न और नाम को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई को मंजूरी देते हुए मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग ने विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न आवंटित किए थे। बनर्जी ने इस फैसले को लोकतांत्रिक इतिहास का “काला दिन” बताया और कहा कि वह पार्टी की पहचान वापस पाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगी। यह घटनाक्रम मई के विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में हुई बगावत का परिणाम है।
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर पार्टी से जुड़ी एक जांच को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहाल को भेजे पत्र में कहा है कि विरोधी पक्ष ऋतब्रत बनर्जी को अब और समय न दिया जाए। बनर्जी ने आरोप लगाया कि ऋतब्रत को बार-बार अतिरिक्त समय देने से जांच में देरी हो रही है। उन्होंने 25 जुलाई की समयसीमा के बाद भी जानकारी न मिलने पर चिंता जताई और कहा कि इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा डगमगा सकता है।