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सरकारी कॉलेजों में सुविधाओं की कमी पर एबीवीपी कार्यकर्ता इंदौर कलेक्ट्रेट में जबरन घुसे

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी के विरोध में इंदौर कलेक्ट्रेट में जबरन प्रवेश किया। पुलिस द्वारा रोके जाने पर नाराज कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटा दिए। पांढरीनाथ पुलिस स्टेशन के प्रभारी सतीश पटेल ने बताया कि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। एबीवीपी की इंदौर महानगर इकाई के सचिव देवेश गुर्जर ने कहा कि उन्होंने प्रशासन को सूचित किया था और ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन अनुचित व्यवहार के कारण कार्यकर्ता नाराज हो गए।

झाबुआ में जमीन विवाद पर विधायक के नेतृत्व में प्रदर्शन, बैरिकेड हटाने पर अधिकारी-पुलिसकर्मी घायल

झाबुआ के कल्याणपुरा में शासकीय पट्टे की जमीन पर हुए खूनी संघर्ष के बाद आदिवासी समाज ने सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेड्स हटा दिए, जिससे एसडीओपी कमलेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। कलेक्टर की अनुपस्थिति पर विधायक की एसडीएम से तीखी बहस हुई। अंत में एडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

जबलपुर: नेत्रहीन छात्रावास की छात्राओं ने प्रिंसिपल पर लगाए गंभीर आरोप, जांच के आदेश

जबलपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान नेत्रहीन छात्रावास की छात्राओं ने प्रिंसिपल पीसी मिश्रा पर गंदी गाली देने और अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं ने हॉस्टल कर्मचारी किरण पर भी अभद्रता का आरोप लगाया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तत्काल महिला अधिकारी को जांच के लिए भेजा। साप्ताहिक जनसुनवाई में कुल 122 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें बुनकर समाज द्वारा भारत पावरलूम सोसायटी की जमीन के कथित दुरुपयोग और अनियमितताओं की जांच की मांग भी शामिल थी।

बालाघाट विधायक मुंजारे ने बूढ़ी शराब दुकान हटाने की मांग की, कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए

बालाघाट कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान विधायक अनुभा मुंजारे ने नवागत कलेक्टर कुमार सत्यम से बूढ़ी की शराब दुकान हटाने की अपील की। विधायक ने बताया कि बूढ़ी की महिलाएं पिछले 114 दिनों से शराब दुकान के विरोध में धरने पर बैठी हैं, क्योंकि उनके बच्चों का भविष्य और मोहल्ले का माहौल प्रभावित हो रहा है। पूर्व कलेक्टर और प्रभारी मंत्री से भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कलेक्टर कुमार सत्यम ने मामले की फाइल मंगाकर समीक्षा करने और स्थानीय विरोध वाले स्थानों से दुकानें हटाने के निर्देश दिए। विधायक ने खुद को आम नागरिक और जनसेवक बताया।

भोपाल और 731 गांवों के भू-अभिलेख तीन माह में होंगे डिजिटल

भोपाल शहर और 731 गांवों के लाखों भू-स्वामियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि वर्ष 1954 से अब तक के खसरे, खतौनी और नामांतरण के भू-अभिलेख अगले तीन महीनों में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे लोगों को प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जिला प्रशासन ने डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें स्कैनिंग, मेटाडेटा तैयार करना और पटवारी द्वारा ऑनलाइन सत्यापन शामिल है। सभी रिकॉर्ड भूलेख पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।