कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय तत्कालीन सरकार द्वारा अपनाए गए रणनीतिक संयम को बाद में संभवतः एक गलती बताया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में लिए गए कई फैसले उस समय सही लगते हैं, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर उनमें सुधार की गुंजाइश दिखती है। खुर्शीद ने वकील जावेद गाया की पुस्तक ‘हार्टलैंड राइजिंग’ के लोकार्पण पर बोलते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने विभाजन और उत्तर प्रदेश की राजनीति का भी जिक्र किया। शिक्षाविद अपूर्वानंद ने भी आजादी के बाद की राजनीति और वैचारिक समझौतों पर सवाल उठाए, जिस पर खुर्शीद ने राष्ट्रीय चरित्र से जुड़ा सवाल बताया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया कि भारत अब वास्तविक अर्थों में लोकतंत्र नहीं रहा, क्योंकि जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाएं कमजोर हो गई हैं। तिवारी ने कहा कि संसद सत्ता हासिल करने का अखाड़ा बन गई है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में बुनियादी बदलाव आवश्यक हैं। उन्होंने लोकसभा के कामकाज के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 17वीं लोकसभा के बैठक के दिन काफी कम रहे और अधिकांश हंगामे में प्रभावित हुए। उन्होंने 18वीं लोकसभा के विधायी कामकाज ठप होने की आशंका भी जताई।